बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के तहत बच्चों को मिलने वाले प्रवेश को लेकर हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने पदभार संभालने के बाद डिवीजन बेंच में सुनवाई के पहले ही दिन आरटीई से जुड़ी जनहित याचिका पर गंभीरता दिखाई। चीफ जस्टिस महापात्र और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से आरटीई के तहत प्रदेश के प्रत्येक स्कूल की स्थिति का विस्तृत ब्योरा मांगा है।

कोर्ट ने साफ कहा है कि सरकार को यह बताना होगा कि आरटीई अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(सी) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए वर्तमान में कौन सी व्यवस्था और मानक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रत्येक स्कूल में आरटीई के तहत कितनी सीटें आरक्षित हैं, इनमें से कितनी सीटों पर बच्चों को प्रवेश दिया गया और कितनी सीटें अभी भी खाली हैं, इसका पूरा आंकड़ा पेश करना होगा।

अब खुलेगी सभी स्कूलों के आरटीई आंकड़ों की पोल

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को प्रदेश के हर स्कूल का अलग-अलग आंकड़ा तैयार करना होगा। सरकार को एक विस्तृत चार्ट के माध्यम से यह जानकारी देनी होगी कि संबंधित स्कूल में आरटीई के तहत कुल कितनी सीटें निर्धारित हैं। इनमें कितने बच्चों को प्रवेश मिला और वर्तमान में कितनी सीटें रिक्त हैं। यानी अब सिर्फ आरटीई लागू होने का दावा पर्याप्त नहीं होगा। सरकार को आंकड़ों के साथ यह बताना होगा कि कानून का वास्तविक लाभ बच्चों तक किस हद तक पहुंच रहा है।

3 सप्ताह में देना होगा शपथ पत्र

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सक्षम अधिकारी के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र और जरूरी चार्ट हाईकोर्ट में पेश किया जाए। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अगली सुनवाई के लिए 5 अक्टूबर 2026 की तारीख रखने का अनुरोध किया, साथ ही कोर्ट को भरोसा दिलाया कि तब तक उनके निर्देशों का पालन किया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई से सात दिन पहले शपथ पत्र पेश किया जाए और उसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए।

14 जनहित याचिकाओं पर चल रही सुनवाई

आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत 13 अन्य लोगों ने अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों पर हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हो रही है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने इन मामलों की सुनवाई डिवीजन बेंच में की। चीफ जस्टिस के पदभार संभालने के बाद पहले ही दिन स्कूली बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़े इस मामले की सुनवाई ने इसे खास बना दिया है। कोर्ट के निर्देश से अब राज्य के प्रत्येक स्कूल में आरटीई के तहत प्रवेश की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

अब आंकड़ों से तय होगी तस्वीर

आरटीई के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने का प्रावधान है। लेकिन योजना के क्रियान्वयन, सीटों की उपलब्धता और प्रवेश की वास्तविक स्थिति को लेकर हमेशा शिकयते सामने आई हैं । हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद सरकार को अब प्रदेशभर के स्कूलों से जुड़ा विस्तृत आंकड़ा अदालत के सामने रखना होगा। 5 अक्टूबर की सुनवाई में यह साफ होगा कि प्रदेश में आरटीई की आरक्षित सीटों का कितना उपयोग हुआ और कितनी सीटें अब भी खाली हैं।