नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में PG की इमारत ढहने से हुए हादसे में पुलिस की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। हादसे में 7 छात्रों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में पुलिस ने आज, 9 सितंबर को PG संचालक सुधांशु को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसे आज ही अदालत में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के साथ मामले में अब तक चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

‘Hostel Daze’ नाम से चल रहा था PG
जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, PG संचालक हरिराम गुप्ता के बेटे महेश गुप्ता ने अगस्त 2025 में इमारत को दो बिजनेस पार्टनर शुभम त्यागी और सुधांशु को लीज पर दिया था। दोनों कथित तौर पर यहां ‘Hostel Daze’ नाम से PG संचालित कर रहे थे। पुलिस ने सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मामले में आरोपी बताए जा रहे शुभम त्यागी के अभी फरार होने की जानकारी है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

महेश गुप्ता की पुलिस कस्टडी भी खत्म
मामले में गिरफ्तार महेश गुप्ता की दो दिन की पुलिस कस्टडी बुधवार को खत्म हो रही है। पुलिस उसे साउथ कैंपस थाने से अदालत में पेश करने के लिए ले गई। उसके साथ बिल्डिंग से जुड़े एक कॉन्ट्रैक्टर और राजमिस्त्री को भी कोर्ट में पेश किए जाने की जानकारी है। पुलिस अब हादसे के पीछे संभावित लापरवाही, इमारत की स्थिति और निर्माण से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

अब तक चार आरोपी गिरफ्तार
हादसे के बाद पुलिस ने PG संचालक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। बुधवार को सुधांशु की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या चार हो गई है। पुलिस जांच का दायरा अब इमारत के स्वामित्व, लीज, PG संचालन और निर्माण से जुड़े लोगों तक बढ़ाया जा रहा है।

जर्जर इमारत को हटाने का काम शुरू
हादसे के बाद अब सत्य निकेतन में जर्जर और कमजोर इमारतों को हटाने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। मौके से सामान हटाने के बाद आसपास की 5-6 इमारतों को खाली कराया गया है, ताकि किसी अन्य हादसे की आशंका को टाला जा सके। कमजोर इमारत को गिराने के लिए भारी मशीनों या बुलडोजर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इमारत को मजदूरों द्वारा हथौड़े और दूसरे छोटे औजारों की मदद से चरणबद्ध तरीके से तोड़ा जा रहा है।

मौके पर MCD और भारी पुलिस बल तैनात
जर्जर इमारत को हटाने की कार्रवाई के दौरान MCD की टीम मौके पर मौजूद है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन की प्राथमिकता आसपास की इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कमजोर संरचना को नियंत्रित तरीके से हटाना है। अब पुलिस जांच में यह सामने आना बाकी है कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसकी स्थिति के बारे में संचालकों और संबंधित जिम्मेदार लोगों को पहले से जानकारी थी या नहीं और भवन की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नहीं।