रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सोशल मीडिया पर साझा किए गए व्यंग्यात्मक वीडियो के मामले में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। रायपुर के सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज होने और उनके निवास पर पुलिस द्वारा नोटिस चस्पा किए जाने के बाद अमित जोगी ने वीडियो संदेश जारी कर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने खुद को फरार बताए जाने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे कानून से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, बल्कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गुजरात में हैं।

गुजरात दौरे पर हैं अमित जोगी, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में बताया कि वे 2 से 8 नवंबर तक गुजरात में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं। उनके मुताबिक, इस दौरे की जानकारी 30 अक्टूबर को ही छत्तीसगढ़ और गुजरात के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दे दी गई थी। इसके बावजूद उनके निवास पर नोटिस चस्पा किया गया।

जोगी ने सवाल उठाया कि जब पुलिस को उनके गुजरात में होने और कार्यक्रमों की पूरी जानकारी पहले से थी, तो इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान उनकी मां और पत्नी को अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पुलिस जांच से बच नहीं रहे हैं और कानून का सम्मान करते हैं।

BNS की धारा 196 लगाने पर जताई आपत्ति

अमित जोगी ने FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 लगाए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है। यह धारा विभिन्न समुदायों और समूहों के बीच वैमनस्य या नफरत फैलाने से संबंधित अपराधों से जुड़ी है।

जोगी का कहना है कि उनके वीडियो का उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाना नहीं था, बल्कि चुनावी व्यवस्था, कथित वोट चोरी और चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक व्यंग्य करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक व्यंग्य को सांप्रदायिक अपराध के दायरे में लाना लोकतांत्रिक असहमति की आवाज दबाने जैसा है।

'ज्ञानू-जानू' वीडियो से शुरू हुआ पूरा विवाद

इस विवाद की शुरुआत अमित जोगी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक व्यंग्यात्मक वीडियो से हुई। वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटे पहने पात्रों को सांकेतिक विवाह और हनीमून से जुड़े दृश्यों में दिखाया गया था।

जोगी ने इसे चुनावी निष्पक्षता और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कटाक्ष बताया था। हालांकि, भाजपा नेताओं ने वीडियो को आपत्तिजनक बताते हुए विरोध दर्ज कराया। रायपुर भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर की शिकायत पर सिविल लाइंस पुलिस ने मामला दर्ज किया।

FIR में BNS की धारा 196, 352, 353(2), 356(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 शामिल बताई गई हैं। विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिया था और माफी भी मांगी थी।

अरस्तूफेनेस और भारतीय विदूषक परंपरा का दिया उदाहरण

अपने बचाव में अमित जोगी ने राजनीतिक व्यंग्य की ऐतिहासिक परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने यूनानी नाटककार अरस्तूफेनेस के नाटक 'नाइट्स' का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राचीन समय से ही व्यंग्य के माध्यम से सत्ता और राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

उन्होंने भारतीय रंगमंच की विदूषक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि हास्य और व्यंग्य के जरिए सामाजिक विसंगतियों तथा सत्ता की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है।

2024 से चुनाव नहीं लड़ने के पीछे बताई यह वजह

अमित जोगी ने चुनावी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने वर्ष 2024 से किसी चुनाव में हिस्सा नहीं लिया है। उनका कहना है कि जब तक चुनावी प्रक्रिया में जरूरी सुधार नहीं होते, तब तक चुनाव में भागीदारी को लेकर उनकी पार्टी की अलग सोच रहेगी।

उन्होंने 'ज्ञानू-जानू' वीडियो को किसी व्यक्ति के निजी जीवन पर टिप्पणी मानने से इनकार करते हुए इसे चुनाव संचालन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर राजनीतिक कटाक्ष बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि वे जेनरेशन Z यानी नई पीढ़ी से संवाद करने के लिए अपनी शैली में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं।

अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें

फिलहाल अमित जोगी के खिलाफ दर्ज FIR और पुलिस के नोटिस के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में है। एक तरफ भाजपा नेता वीडियो को संवैधानिक पदों की गरिमा के खिलाफ बता रहे हैं, वहीं अमित जोगी इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक व्यंग्य से जुड़ा मामला बता रहे हैं।

अब पुलिस जांच में वीडियो की सामग्री, शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित धाराओं के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। मामले का अंतिम कानूनी निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।