
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने अपनी लंबित प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) के भुगतान और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। गुरुवार को प्रदेशभर से सैकड़ों की संख्या में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी नवा रायपुर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। तूता धरना स्थल पर एकत्रित हुए CHO ने स्वास्थ्य भवन का घेराव कर शासन और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों ने पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और जल्द से जल्द समस्याओं का निराकरण करने की मांग की।
CHO संघ का कहना है कि लंबे समय से प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनियमितता और देरी की समस्या बनी हुई है। कई बार शासन और राज्य कार्यालय का ध्यान आकर्षित कराने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। इसी के विरोध में प्रदेशभर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
3-4 साल से इंसेंटिव भुगतान की समस्या, 7-8 महीने की राशि अटकी
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के मुताबिक, पिछले 3 से 4 वर्षों से इंसेंटिव भुगतान को लेकर लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं। वहीं, पिछले 7 से 8 महीनों की प्रोत्साहन राशि भी अब तक लंबित है। संघ का आरोप है कि राज्य कार्यालय की ओर से भुगतान को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जिला और ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इनका पालन नहीं किया जा रहा है।
इसका सीधा असर CHO के आर्थिक हितों पर पड़ रहा है। भुगतान प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
CHO संघ की पांच सूत्रीय प्रमुख मांगें
प्रदर्शन के दौरान संघ ने अपनी पांच प्रमुख मांगों को शासन के सामने रखा। इनमें लंबित भुगतान से लेकर कार्य-दायित्वों में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग शामिल है।
1. अनुचित आदेश निरस्त करने और लंबित भुगतान की मांग: संघ ने इंसेंटिव घोटाले के नाम पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ जारी द्वेषपूर्ण और अनुचित आदेश को तत्काल निरस्त या संशोधित करने की मांग की है। इसके साथ ही पिछले 7-8 महीनों से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान सुनिश्चित करने की बात कही है।
2. इंसेंटिव को मूल वेतन में शामिल किया जाए: भुगतान में बार-बार होने वाली अनियमितताओं और अव्यवस्थाओं को समाप्त करने के लिए संघ ने प्रोत्साहन राशि को CHO के मूल वेतन में समायोजित करने की मांग रखी है। संघ का मानना है कि इससे भुगतान संबंधी परेशानियों से स्थायी राहत मिल सकती है।
3. कार्य-दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण: उप स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ सभी मानव संसाधनों के कार्य-दायित्वों (TOR) का पुनरीक्षण करने की मांग की गई है। संघ चाहता है कि प्रत्येक पद के अनुसार स्पष्ट और न्यायसंगत कार्य-विभाजन किया जाए, ताकि कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार न पड़े।
4. सुकमा जिले के इंसेंटिव भुगतान की जांच: संघ ने सुकमा जिले में PLP पोर्टल पर सत्यापन के बाद निर्धारित ग्रेड के विपरीत मनमाने तरीके से प्रोत्साहन राशि का भुगतान किए जाने का आरोप लगाया है। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के साथ ही भुगतान की अंतर राशि तत्काल देने की मांग की गई है।
5. लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई: संघ ने मांग की है कि प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक प्रोत्साहन राशि के सत्यापन और भुगतान संबंधी शासन एवं राज्य कार्यालय के निर्देशों का पालन नहीं करने वाले जिला और ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
प्रदेश अध्यक्ष बोले- CHO की समस्याओं की हो रही अनदेखी
संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्रदेश की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने में CHO की जिम्मेदारी बेहद अहम है। इसके बावजूद उनके आर्थिक हितों, कार्य परिस्थितियों और सेवा संबंधी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य कार्यालय द्वारा जारी आदेशों का पालन यदि जिला और ब्लॉक स्तर पर सुनिश्चित नहीं कराया जा सकता, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने शासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान निकालने की अपील की।
आंदोलन से स्वास्थ्य विभाग में बढ़ी हलचल
CHO के इस प्रदर्शन से स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि वे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन समय पर प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने और सेवा संबंधी परेशानियों के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अब देखना होगा कि शासन और स्वास्थ्य विभाग संघ की पांच सूत्रीय मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित इंसेंटिव भुगतान सहित अन्य समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।