सरगुजा। अंबिकापुर के राममंदिर रोड स्थित मुकेश प्लास्टिक एवं पटाखा होलसेल दुकान में लगी भीषण आग के मामले में अब पुलिस ने अपना रुख सख्त कर लिया है। सरगुजा आईजी के कड़े दखल के बाद आखिरकार पुलिस की नींद टूटी और आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में गैर जमानती और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं जोड़ दी गई हैं। पहले स्थानीय पुलिस ने इस गंभीर मामले में भी मामूली धाराएं लगाकर आरोपियों को बचाने की कोशिश की थी जिस पर आईजी ने गहरी नाराजगी जताई है।

बीते 23 अप्रैल को राममंदिर गली में स्थित इस तीन मंजिला दुकान में भयानक आग लग गई थी। गोदाम में भारी मात्रा में पटाखे रखे हुए थे जिनमें आग लगने के बाद एक के बाद एक कई जोरदार धमाके हुए। धमाकों और आग की लपटों ने इतना विकराल रूप ले लिया कि तीन मंजिला इमारत पूरी तरह से जलकर खाक हो गई और उसका एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इस खौफनाक हादसे की चपेट में आकर आसपास के आठ अन्य मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था और लोगों की जान पर बन आई थी।

इतने बड़े हादसे के बाद भी कोतवाली पुलिस ने शुरुआती दौर में बेहद हल्की धाराओं में अपराध दर्ज किया था। ऐसा लग रहा था जैसे मामले को रफा दफा करने की तैयारी चल रही हो। जब यह बात सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा तक पहुंची तो उन्होंने पुलिस की इस कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सीधे एसपी के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया कि आखिर इतनी बड़ी घटना में उचित धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। आईजी के सख्त निर्देश के बाद पुलिस ने आनन फानन में बीएनएस की धारा 324 और 326 छ के साथ विस्फोटक अधिनियम की धारा 9 ख प्रकरण में जोड़ दी है।

इस बीच फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी एफएसएल की टीम ने भी घटनास्थल की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। टीम को मौके से भारी मात्रा में जले हुए पटाखों के अवशेष मिले हैं जिससे यह साफ हो गया है कि वहां अवैध रूप से विस्फोटकों का जखीरा मौजूद था। अब मुकेश पटाखा एजेंसी के संचालक मुकेश अग्रवाल और उनके रिश्तेदार प्रवीण अग्रवाल की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं क्योंकि नई धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर दस साल तक की जेल हो सकती है।

दूसरी तरफ नगर निगम भी अब हरकत में आया है। निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने आग से जर्जर हो चुकी इस तीन मंजिला इमारत को बेहद खतरनाक घोषित कर दिया है। उन्होंने भवन संचालक को चौबीस घंटे के भीतर इमारत को सुरक्षित तरीके से गिराने का नोटिस थमाया था लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। इधर फॉरेंसिक अधिकारी कुलदीप कुजूर का कहना है कि उनकी टीम एक बार फिर मौके का बारीकी से मुआयना करेगी ताकि आग लगने के असल कारणों और वहां रखे पटाखों की सही मात्रा का सटीक पता लगाया जा सके। फिलहाल केमिकल एनालिसिस की रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है जिसके बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।