बिलासपुर/कोटा। छत्तीसगढ़ की सरकार भले ही भ्रष्टाचार पर "जीरो टॉलरेंस" का डंका पीट रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जल संसाधन विभाग (जिसका प्रभार खुद मुख्यमंत्री के पास है) की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना अरपा-भैंसाझार बैराज में 'टेंडर-टेंडर' का अजब खेल चल रहा है। राष्ट्रीय जगत विज़न न्यूज़ की पड़ताल में कार्यपालन अभियंता आई.ए. सिद्दीकी का यह सुनियोजित पैटर्न बेनकाब हुआ है, जहां मूल ई.पी.सी. (EPC) अनुबंध को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को करोड़ों के काम रेवड़ी की तरह बांटे जा रहे हैं।

1141.90 करोड़ की लागत, फिर भी अलग से टेंडर क्यों?

ई.पी.सी. मोड में चल रही इस परियोजना की मूल लागत 606 करोड़ रुपये थी, जो छलांग मारकर 1141.90 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। कायदे से बैराज, नहर, सुरक्षा कार्य और एप्रोच रोड जैसे सारे काम मूल एजेंसी (राधेश्याम अग्रवाल/सुनील अग्रवाल) को ही करने थे। इसके एवज में उन्हें 317.59 करोड़ रुपये का भुगतान भी हो चुका है। मकसद था कि 25,000 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता वाला यह पूरा सिस्टम तैयार कर विभाग को सौंपा जाए। लेकिन कोटा जल संसाधन संभाग के ऑफिस में बैठे अफसरों ने नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाईं कि पूरा सिस्टम ही कटघरे में आ गया है।

केस 1 : पहली बारिश में ही बह गया करोड़ों का 'प्रोटेक्शन'

"बिना फिल्टर के पी.सी.सी. ब्लॉक और त्रुटिपूर्ण डिजाइन ने डुबोए करोड़ों रुपये।"

दस्तावेज बताते हैं कि बैराज के डाउन-स्ट्रीम में बैंक प्रोटेक्शन का काम मूल ठेकेदार से छीनकर, तत्कालीन मुख्य अभियंता अजय सोमवार की मिलीभगत से अलग तकनीकी स्वीकृति (अनुबंध 10/डी.एल./2020-21) के जरिए दूसरी एजेंसी को दे दिया गया। नतीजा? जुलाई 2025 की पहली झमाझम बारिश में ही 500 मीटर में से 112 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। वजह थी डिजाइन में भारी खोट। अब जवाबदेही तय करने के बजाय, वर्तमान प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम की छत्रछाया में उसी पैटर्न पर रिटेनिंग वॉल के नाम पर फिर से नई निविदा निकालने की खिचड़ी पक रही है।

केस 2 : डामर सड़क के नाम पर फिर वही हथकंडा

सिद्दीकी का यह 'खेल' यहीं नहीं रुका। अब हेड वर्क से 2,500 मीटर तक डामर सड़क (Construction for Tar Road) बनाने के लिए 194.82 लाख रुपये (लगभग 1.94 करोड़ रुपये) का नया टेंडर (अनुबंध 2/डी.एल./2024-25) 17 सितंबर 2024 को मेसर्स अविनाश बिल्डकॉन के नाम जारी कर दिया गया। जबकि सड़क का यह काम मूल निविदा शर्तों में स्वाभाविक रूप से शामिल था। इस बार भी तत्कालीन मुख्य अभियंता जे.आर. भगत के साथ मिलकर कागजी घोड़े दौड़ाए गए और तीसरी एजेंसी को ठेका थमा दिया गया।

शिकायतकर्ता ने सरकार के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें:

  •  कार्यपालन अभियंता आई.ए. सिद्दीकी को तुरंत सस्पेंड कर, कोटा संभाग से जारी सभी खंडित निविदाओं (अनुबंध 10/डी.एल./2020-21 व 2/डी.एल./2024-25) की उच्चस्तरीय जांच हो।
  •  विवादित तकनीकी स्वीकृतियों में सहयोगी रहे तत्कालीन मुख्य अभियंताओं (अजय सोमवार और जे.आर. भगत) पर विभागीय गाज गिरे और वसूली सुनिश्चित की जाए।
  • मूल EPC अनुबंध से बाहर निकालकर अलग से बांटे गए सभी कार्यों की पूरी फेहरिस्त सार्वजनिक की जाए, ताकि पता चले कि मलाई किसे चटाई गई।
  • सिद्दीकी के खिलाफ लंबित पुरानी शिकायतों की समयसीमा में जांच हो, ताकि "जीरो टॉलरेंस" सिर्फ कागजों की शोभा न बढ़ाए।
  •  क्षति की जिम्मेदारी तय किए बिना नए टेंडर निकालने वाले वर्तमान प्रमुख अभियंता जितेंद्र नेताम की भूमिका की भी बारीकी से समीक्षा हो।