बिलासपुर : दीपावली का बाजार सज चुका है। मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावट का खतरा भी मंडराने लगा है। ऐसे में लोगों की सेहत से जुड़े इस मुद्दे पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कोटा और सीपत क्षेत्र में औचक जांच अभियान चलाया। टीम ने तीन मिठाई दुकानों से खोवा, बेसन लड्डू और कुंदा के नमूने तो लिए, लेकिन इस कार्रवाई ने मिलावट के खिलाफ विभाग की मुहिम पर संदेह होने लगे हैं। व्यापारियों का आरोप है कि शहर की बड़ी मिठाई दुकानों और उनके उत्पादन केंद्रों को छोड़कर छोटे कारोबारियों के यहां जांच करना आखिर किस तरह की कार्रवाई है? उनका कहना है कि त्योहार के सीजन में छोटी दुकानों पर इस तरह की छापेमारी से ग्राहकी प्रभावित हो रही है, जबकि मिलावट की आशंका वाले बड़े ठिकानों तक विभाग की पहुंच नहीं दिख रही।

तीन दुकानों से चार नमूने, प्रयोगशाला में होगी जांच

अभिहित अधिकारी आर आर देवांगन के अनुसार खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने करगी रोड स्थित अनुराधा स्वीट्स से खोवा का नमूना लिया। गुड़िया स्वीट्स से बेसन लड्डू और कुंदा के सैंपल संग्रहित किए गए। वहीं सीपत स्थित किशोर स्वीट्स से कुंदा का नमूना लिया गया। इन सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की तैयारी है। रिपोर्ट आने के बाद ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनमें मिलावट की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई, बड़े प्रतिष्ठानों पर चुप्पी क्यों?

विभाग की कार्रवाई के बाद स्थानीय व्यापारियों ने जांच अभियान की निष्पक्षता पर संदेह जताया हैं। गुड़िया स्वीट्स और अनुराधा स्वीट्स के संचालकों सहित अन्य कारोबारियों का कहना है कि शहर में बड़े-बड़े मिठाई प्रतिष्ठान संचालित हैं। कई दुकानों के अपने उत्पादन केंद्र और फैक्ट्रियां भी हैं, जहां बड़े पैमाने पर मिठाइयां तैयार होती हैं। ऐसे में विभाग को सबसे पहले इन प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, साफ-सफाई और तैयार मिठाइयों की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि छोटे दुकानदारों के लिए दीपावली का सीजन सालभर की कमाई का बड़ा अवसर होता है। इसी दौरान अचानक जांच और कार्रवाई से ग्राहकों के बीच गलत संदेश जाता है और कारोबार प्रभावित होता है। यदि मिलावट के खिलाफ अभियान चल रहा है तो जांच का दायरा सभी दुकानों और मिठाई निर्माण इकाइयों तक समान रूप से होना चाहिए।

ग्रामीण इलाकों में भी मिलावट की आशंका

दूसरी ओर अभिहित अधिकारी आर आर देवांगन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका को देखते हुए एहतियातन दुकानों की जांच की गई है। विभागीय निर्देशों के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसी व्यापारी को परेशान करना नहीं, बल्कि त्योहार के दौरान लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट मिलने के बाद गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।