
Chhattisgarh Education News: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में तिमाही परीक्षाएं शुरू होते ही शिक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। सोमवार से शुरू हुई परीक्षा के पहले ही दिन कई स्कूलों में प्रश्न पत्रों की व्यवस्था को लेकर अव्यवस्था सामने आने की खबर है। कहीं शिक्षकों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर प्रश्न पत्रों के प्रिंटआउट निकलवाने पड़े, तो कहीं ब्लैकबोर्ड पर सवाल लिखकर विद्यार्थियों की परीक्षा ली गई।
मिली जानकारी के मुताबिक, 10वीं और 12वीं को छोड़कर अन्य कक्षाओं के प्रश्न पत्र PDF फॉर्मेट में भेजे गए थे। ऐसे में स्कूलों को खुद ही इनकी छपाई की व्यवस्था करनी पड़ी। शिक्षकों का आरोप है कि समय पर प्रश्न पत्र नहीं मिलने और प्रिंटिंग के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने से परीक्षा संचालन में मुश्किलें आईं। इस स्थिति ने परीक्षा की तैयारियों, गोपनीयता और विद्यार्थियों को उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
परीक्षा से ठीक पहले भेजे गए प्रश्न पत्र, स्कूलों को खुद करनी पड़ी छपाई
शिक्षकों के अनुसार, सोमवार से परीक्षा शुरू होनी थी, लेकिन प्रश्न पत्रों से जुड़ा ईमेल शनिवार को भेजा गया। बताया गया कि ईमेल खुल नहीं पाया, जिसके बाद रविवार को PDF उपलब्ध कराई गई। रविवार को प्रिंटिंग की व्यवस्था करना भी स्कूलों के लिए चुनौती बन गया। कई स्कूलों में प्रश्न पत्रों की छपाई के लिए शिक्षकों को अलग-अलग प्रिंटिंग सेंटर और अन्य स्रोतों से संपर्क करना पड़ा। आरोप है कि समय पर पेपर और प्रिंटिंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण परीक्षा की तैयारियां प्रभावित हुईं।
कहीं ब्लैकबोर्ड पर लिखे सवाल, कहीं चंदा जुटाकर छपवाए पेपर
प्रश्न पत्रों की छपाई के लिए अलग से राशि नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। शिक्षकों के मुताबिक, विभाग की ओर से प्रिंटआउट का खर्च उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसे में कुछ स्कूलों के शिक्षकों ने आपस में पैसे इकट्ठा कर प्रश्न पत्र प्रिंट करवाए। एक शिक्षक के अनुसार, शिक्षकों ने 500-500 रुपये का योगदान देकर छपाई की व्यवस्था की। वहीं, कुछ स्कूलों में प्रश्न पत्रों की कमी या छपाई की समस्या के चलते ब्लैकबोर्ड पर सवाल लिखकर परीक्षा ली गई। इससे परीक्षा के संचालन के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं।
परीक्षा की गोपनीयता पर भी उठे सवाल
प्रश्न पत्र PDF के रूप में स्कूलों को भेजे जाने के बाद उनकी छपाई अलग-अलग स्थानों पर कराई गई। इससे परीक्षा के प्रश्न पत्रों की गोपनीयता बनाए रखने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक स्कूल प्राचार्य के मुताबिक, 10वीं और 12वीं के प्रश्न पत्र भेजे गए थे, जबकि बाकी कक्षाओं के पेपर PDF के जरिए साझा किए गए। शनिवार को प्रश्न पत्र मिलने और रविवार को प्रिंटिंग की व्यवस्था करने के कारण स्कूलों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
निर्धारित समय से देरी से शुरू हुई परीक्षा
एक शिक्षक ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर बताया कि शनिवार को बीईओ और बीआरसी की ओर से भेजा गया ईमेल कथित तौर पर करप्ट था। इसके बाद PDF भेजी गई, जो रविवार रात को मिली। शिक्षक के अनुसार, सोमवार सुबह प्रश्न पत्रों का प्रिंटआउट निकलवाने के चलते परीक्षा निर्धारित सुबह 10 बजे के बजाय करीब 30 मिनट से एक घंटे की देरी से शुरू हुई। हालांकि, यह स्थिति सभी स्कूलों में रही या कुछ संस्थानों तक सीमित थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
परीक्षा शुरू, लेकिन कई स्कूलों में किताबें अब भी अधूरी
तिमाही परीक्षा के बीच राजधानी रायपुर के कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों को पूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई है। एक शिक्षक के मुताबिक, स्कूल में किताबें कम पहुंचने के कारण कई बच्चों को सभी विषयों की पुस्तकें नहीं मिल पाईं। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से सभी स्कूलों में किताबें पहुंचने की बात कही गई। हालांकि, स्कूलों से अब भी मांग पत्र मंगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पुस्तक वितरण की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
युक्तियुक्तकरण से मर्ज स्कूलों में ज्यादा परेशानी का दावा
जानकारों के मुताबिक, प्रश्न पत्रों की छपाई और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानी उन स्कूलों में अधिक देखने को मिली, जिन्हें युक्तियुक्तकरण के तहत मर्ज किया गया है। हालांकि, इस दावे की व्यापकता और प्रभावित स्कूलों की संख्या की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल, तिमाही परीक्षा के पहले दिन सामने आई इन शिकायतों ने शिक्षा विभाग की तैयारी और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि विभाग इन समस्याओं की समीक्षा कर आगामी परीक्षाओं के लिए क्या व्यवस्था करता है ?