रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। आने वाले समय में विधानसभा का कामकाज पूरी तरह डिजिटल करने की योजना है। इसके तहत विधायकों के सवाल, उनके जवाब, जरूरी दस्तावेज और विधानसभा की विभिन्न समितियों से जुड़े काम ऑनलाइन किए जाएंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कागजी दस्तावेजों और फाइलों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही विधानसभा के कामकाज में तेजी, पारदर्शिता और बेहतर समन्वय आने की उम्मीद है।

इस पूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन (NeVA) का उपयोग किया जाएगा। इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हो गया है। इस दौरान विधानसभा के अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल और उसकी कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई।

तीन प्रमुख मॉड्यूल से डिजिटल होगा विधानसभा का कामकाज

प्रशिक्षण कार्यक्रम में NeVA के तीन प्रमुख मॉड्यूल एडमिन, प्रश्न और समिति के संचालन की जानकारी दी गई। इन मॉड्यूल के माध्यम से विधानसभा के अलग-अलग विभागों के कामकाज को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी है।

प्रश्न मॉड्यूल: इसके जरिए विधानसभा में विधायकों की ओर से पूछे जाने वाले सवालों और उनसे संबंधित जानकारियों का ऑनलाइन प्रबंधन किया जाएगा। सवालों को दर्ज करने, उनके जवाब तैयार करने और संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया डिजिटल होगी। इससे प्रश्नों से जुड़े कामकाज में समय की बचत होगी और सूचनाओं का प्रबंधन आसान बनेगा।

समिति मॉड्यूल: विधानसभा की विभिन्न समितियों से संबंधित दस्तावेज, सूचनाएं और जरूरी विधायी कार्य ऑनलाइन किए जा सकेंगे। इससे समिति से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में आसानी होगी।

एडमिन मॉड्यूल: इसके माध्यम से डिजिटल सिस्टम के संचालन, प्रबंधन और प्रशासनिक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाएगा। इससे विधानसभा के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।

अधिकारियों-कर्मचारियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय के NeVA समन्वयक अमन गौतम और श्रीधर स्वामी ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। इसमें छत्तीसगढ़ विधानसभा के साथ छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के अधिकारी-कर्मचारी भी शामिल हुए।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि किस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम किया जाएगा और अलग-अलग मॉड्यूल का इस्तेमाल करके विधायी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों को नई तकनीकी व्यवस्था के लिए तैयार करना है, ताकि NeVA लागू होने के बाद कामकाज में किसी तरह की परेशानी न आए।

क्या है NeVA और कैसे बदलेगा विधानसभा का कामकाज

राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन यानी NeVA भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय की एक डिजिटल पहल है। इसका उद्देश्य देश की विधानसभाओं और विधान परिषदों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। इसके माध्यम से विधायी कार्यों को तकनीक आधारित बनाकर कागजों पर निर्भरता कम करने की योजना है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होने पर विधायकों के सवाल-जवाब, सदन से जुड़े दस्तावेज और समितियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेगा। इससे दस्तावेजों की छपाई पर होने वाला खर्च घटेगा। कागज की खपत कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा पुराने रिकॉर्ड को खोजना, सुरक्षित रखना और जरूरत के समय उपलब्ध कराना आसान होगा।

ट्रेनिंग पूरी, अब पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था लागू होने का इंतजार

हालांकि, दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होने का मतलब यह नहीं है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा तत्काल पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगी। इसके लिए डिजिटल सिस्टम को व्यवस्थित रूप से लागू करना होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित अभ्यास के साथ नई तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।

विधानसभा के रोजमर्रा के कामकाज में जब कागजी फाइलों की जगह NeVA प्लेटफॉर्म का नियमित उपयोग शुरू होगा, तभी इस बदलाव का वास्तविक असर दिखाई देगा। खास बात यह है कि विधायकों के सवाल, सरकार के जवाब और समितियों से जुड़े दस्तावेज सीधे जनहित से जुड़े होते हैं। ऐसे में इनका डिजिटल होना भविष्य में विधायी कामकाज को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।