
रायपुर : छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी अब केवल पात्रता परीक्षा नहीं, बल्कि नौकरी में बने रहने और पदोन्नति पाने की अनिवार्य शर्त बन गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में राज्य सरकार ने सेवारत गैर-टीईटी शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत दिसंबर-जनवरी में कंप्यूटर आधारित टीईटी परीक्षा कराने की तैयारी है। खास बात यह है कि गैर-टीईटी शिक्षकों को राहत देते हुए सरकार साल में कम से कम दो बार विशेष परीक्षा आयोजित करेगी।
पांच साल से अधिक सेवा बाकी तो टीईटी अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक कार्यरत ऐसे सभी सेवारत शिक्षकों के लिए समुचित स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा, जिनकी सेवा अवधि पांच साल या उससे अधिक शेष है। ऐसे शिक्षक टीईटी पास किए बिना न तो सेवा में बने रहने की पात्रता पूरी कर सकेंगे और न ही भविष्य में पदोन्नति का लाभ ले सकेंगे। इस फैसले से प्रदेश के उन शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने अब तक टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
सीजीएसएसबी की परीक्षा से अलग होगा विशेष इंतजाम
शासन ने गैर-टीईटी शासकीय शिक्षकों को परीक्षा का अतिरिक्त अवसर देने के लिए अलग व्यवस्था तैयार की है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित होने वाली सामान्य परीक्षा के अलावा निजी तकनीकी सेवा प्रदाता कंपनी के माध्यम से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) आयोजित की जाएगी। परीक्षा एक से अधिक पालियों में हो सकती है। हालांकि सभी पालियों में प्रश्नपत्रों का स्तर एक समान रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी पाली के अभ्यर्थियों के साथ असमानता न हो।
पास होने पर एससीईआरटी जारी करेगा प्रमाणपत्र
विशेष टीईटी परीक्षा में सफल होने वाले शिक्षकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। यानी परीक्षा की प्रक्रिया से लेकर पात्रता प्रमाणपत्र तक की व्यवस्था निर्धारित की गई है।
दिसंबर-जनवरी में परीक्षा की तैयारी, पाठ्यक्रम भेजने के निर्देश
सेवारत शासकीय शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी परीक्षा दिसंबर-जनवरी में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसके मद्देनजर एससीईआरटी रायपुर से प्राप्त परीक्षा का पाठ्यक्रम सभी सेवारत गैर-टीईटी शासकीय शिक्षकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शिक्षक समय रहते तैयारी शुरू कर सकें। अब गैर-टीईटी शिक्षकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तय समय में परीक्षा पास करने की होगी। सरकार की विशेष परीक्षा व्यवस्था उन्हें अवसर जरूर देगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टीईटी की अनिवार्यता से बचने का रास्ता आसान नहीं रहने वाला है।