कोरबा। छत्तीसगढ़ से बिहार जा रही एक यात्री बस उस समय कुछ देर के लिए चलती-फिरती डिलीवरी रूम में बदल गई, जब सफर के दौरान एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। तेज बारिश और रात का समय होने के बावजूद बस में मौजूद यात्रियों ने हिम्मत दिखाई और महिला की सुरक्षित डिलीवरी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में मां और नवजात को बलरामपुर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दोनों की हालत सामान्य बताई गई है।

सफर के दौरान अचानक शुरू हुई प्रसव पीड़ा
जानकारी के अनुसार, राजहसन ट्रेवल्स की बस आज रात कोरबा से पटना के लिए रवाना हुई थी। बस में कोरबा निवासी गर्भवती महिला अपने पति के साथ यात्रा कर रही थी। रात करीब 11 बजे, अंबिकापुर पार करने के बाद महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। देखते ही देखते उसकी स्थिति ऐसी हो गई कि अस्पताल पहुंचने का इंतजार करना संभव नहीं था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बस चालक ने तत्काल वाहन को सुरक्षित स्थान पर सड़क किनारे रोक दिया, ताकि महिला को प्राथमिक सहायता मिल सके।

महिला यात्रियों ने संभाली जिम्मेदारी
बस रुकते ही उसमें सवार महिला यात्रियों ने बिना समय गंवाए प्रसूता की मदद शुरू कर दी। सुनती देवी सहित अन्य महिलाओं ने एक-दूसरे का सहयोग करते हुए बस के भीतर ही सुरक्षित प्रसव कराया। कुछ यात्रियों ने गोपनीयता बनाए रखने के लिए चादरों और कपड़ों से अस्थायी घेरा बनाया, जबकि अन्य लोगों ने जरूरी सामान उपलब्ध कराया। यात्रियों की सूझबूझ और सहयोग की बदौलत महिला ने एक स्वस्थ शिशु को जन्म दिया। कठिन परिस्थितियों में भी सभी ने धैर्य बनाए रखा, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति नहीं बनी।

अस्पताल पहुंचते ही शुरू हुआ इलाज
प्रसव के बाद बस अपनी यात्रा जारी रखते हुए बलरामपुर पहुंची। वहां से महिला और नवजात को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने दोनों की स्वास्थ्य जांच की और आवश्यक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार, मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी स्थिति खतरे से बाहर है। चिकित्सकीय निगरानी में दोनों की देखभाल की जा रही है।

यात्रियों ने दी आर्थिक मदद, गूंजीं बधाइयां
बताया जा रहा है कि महिला कोरबा की रहने वाली है और यह उसकी पहली संतान है। घटना के समय बस में लगभग 30 से 35 यात्री सवार थे। जैसे ही नवजात के जन्म की खबर बस में फैली, यात्रियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कई लोगों ने नवजात को आशीर्वाद दिया, जबकि कुछ यात्रियों ने परिवार की मदद के लिए स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग भी किया। यह घटना केवल एक सुरक्षित प्रसव की कहानी नहीं रही, बल्कि यह भी दिखाती है कि मुश्किल समय में अनजान लोग भी एक-दूसरे का सहारा बनकर मानवता की मिसाल पेश कर सकते हैं।