
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में भ्रष्टाचार का नया कारनामा सामने आया है। जल संसाधन संभाग कोटा में बने दबेना एनीकट प्रोजेक्ट में अफसरों और ठेकेदार की ऐसी जुगलबंदी दिखी, जिसने सरकारी खजाने को लाखों का चूना लगाने की पटकथा लिख दी थी। मामला प्राइस एस्केलेशन (महंगाई भत्ते) की आड़ में फर्जी बिलिंग का है। यहां तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आई. ए. सिद्दीकी, अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) और सब-इंजीनियर ने मिलकर मेसर्स श्रृंग कंस्ट्रक्शन को 27 लाख रुपये से ज्यादा का मनमाना पेमेंट कर दिया।
ऐसे हुआ आंकड़ों का खेल
निर्माण कार्य का ठेका अंबिकापुर की कंपनी श्रृंग कंस्ट्रक्शन को मिला था। प्रोजेक्ट की लागत 413.24 लाख रुपये तय थी। काम के दौरान डीजल के रेट बढ़ने पर ठेकेदार को जो भुगतान होना था, उसमें बड़ा खेल हुआ। बाजार में डीजल की वास्तिवक कीमत 95.84 रुपये प्रति लीटर थी। लेकिन अधिकारियों ने माप पुस्तिका (एमबी) में इसे 152.10 रुपये प्रति लीटर लिख दिया।
यानी प्रति लीटर 56 रुपये से ज्यादा का मुनाफा। इस फर्जी एंट्री के आधार पर ठेकेदार को करीब 3 लाख रुपये का भुगतान होना था, लेकिन उसे 27 लाख 49 हजार 128 रुपये थमा दिए गए। लगभग 24 लाख रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त फायदा ठेकेदार की झोली में डाल दिया गया।
फाइलों से उठी धूल तो खुली पोल
कई महीनों तक यह खेल चलता रहा। ठेकेदार इस सरकारी रकम का मजे से इस्तेमाल करता रहा। भंडाफोड़ तब हुआ जब नए कार्यपालन अभियंता डी. जैसवाल ने कुर्सी संभाली। उन्होंने कार्यालय में पुरानी फाइलों और रिकॉर्ड की जांच की, तो डीजल के इस फर्जीवाड़े की खुलासा हुआ। उन्होंने तुरंत ठेकेदार को नोटिस जारी किया और राशि जमा करने के निर्देश दिये। इसके बाद ठेकेदार ने चुपचाप 24 लाख रुपये विभाग में वापस लौटा दिए। रकम वापसी का आंकड़ा भी घोटाले की रकम से पूरी तरह मेल खाता है।
दागी अफसरों पर मेहरबानी क्यों?
पैसे वापस आ गए, लेकिन क्या इससे अपराध खत्म हो जाता है? जिन अधिकारियों (कार्यपालन अभियंता, एसडीओ और सब-इंजीनियर) ने मिलीभगत कर सरकारी पैसे का बंदरबांट हुआ, उनके खिलाफ अब तक कोई भी अनुशासनात्मक या आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई है। यह विभाग वर्तमान में मुख्यमंत्री के प्रभार में आता है। ऐसे में इस तरह के कारनामे सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को कठघरे में खड़ा करते हैं।
दागदार रहा है विभाग का इतिहास
- मेसर्स श्रृंग कंस्ट्रक्शन का यह पहला विवाद नहीं है। इसी कंपनी पर बिना काम किए 54 लाख रुपये निकालने के आरोप भी पहले लग चुके हैं।
- जल संसाधन विभाग में टेंडर घोटालों का पुराना इतिहास रहा है।
- अंबिकापुर के 96 करोड़ रुपये के एनीकट घोटाले में पहले ही EOW तीन बड़े अधिकारियों और आठ ठेकेदारों पर चालान पेश कर चुकी है।