
बिलासपुर। निलंबित आईपीएस रतनलाल डांगी द्वारा पुलिस सब-इंसपेक्टर की पत्नी से अश्लील हरकतें और यौन उत्पीड़न के मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच ने पुलिस विभाग की लचर कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए 7 दिन के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का आदेश दिया है। 2 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में पुलिस विभाग की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि अगर तय समय में जवाब नहीं मिला, तो 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में ऑफिसर-इन-चार्ज (डीजीपी) स्वयं उपस्थित हों।
बिलासपुर निवासी पीड़िता पेशे से योगा टीचर है और उसके पति पुलिस विभाग में सब-इंसपेक्टर हैं। याचिका के मुताबिक, साल 2017 में डांगी बस्तर में डीआईजी थे, तब उन्होंने फेसबुक के जरिए पीड़िता से जान पहचान बढ़ाई । बाद में चंदखुरी पदस्थापना के दौरान (2022-2023) आईजीपी रहते हुए डांगी ने योगा सीखने के बहाने वीडियो कॉल करना शुरू किया। महिला का आरोप है कि आईजीपी डांगी सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक पीड़िता पर व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रहने का दबाव बनाते थे। कॉल के दौरान वे पूरे कपड़े उतारकर नग्न हो जाते और अश्लील मैसेज भेजते थे। पीड़िता ने जब इसका विरोध किया, तो आईपीएस डांगी ने धमकी दी कि वह उसके पति पर झूठा आपराधिक प्रकरण दर्ज कराकर जेल भेज देगा और उसका ट्रांसफर घोर नक्सल प्रभावित जिले में कराकर परिवार बर्बाद कर देगा।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की धमकियों से घबराकर पीड़िता प्रताड़ना सहती रही। आखिरकार 15 अक्टूबर 2025 को पीड़िता ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रायपुर के समक्ष लिखित शिकायत की। जांच के लिए जो समिति बनाई गई, उस पर भी विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस महानिदेशक ने आईजीपी डांगी से निचले पद की अधिकारी डीआईजीपी मिलना कुर्रे और समान रैंक के आईजीपी आनंद छाबड़ा को जांच सौंप दी। हाईकोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने तर्क दिया कि दोनों अधिकारी अपनी जांच में डांगी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। जांच अधिकारी आनंद छाबड़ा खुद महादेव सट्टा एप मामले में आपराधिक प्रकरण में पार्टी हैं। ऐसे में दागी अधिकारी को इतनी संवेदनशील जांच सौंपना नैसर्गिक न्याय का घोर उल्लंघन है। महिला ने 20 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार और राज्य के गृह सचिव को भी पत्र भेजा गया, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
महिला ने आईपीएस डांगी की करोड़ों की अवैध संपत्ति का भी शिकायत की है, जिसकी जांच पुलिस समिति ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दी। शिकायत के अनुसार खुद को राजस्थान के मजदूर परिवार का सदस्य बताने वाले डांगी और उनके परिवार के नाम पर अथाह संपत्ति है। इनमें रायपुर के धरमपुरा में 15-20 करोड़ का तीन मंजिला मकान, पत्नी मंजू डांगी के नाम पर राजस्थान के चौसेली और परबतसर में जमीन-मकान, तीनों बेटों के नाम पर छत्तीसगढ़ में अस्पताल के लिए करोड़ों की जमीन शामिल है। इसके अलावा कोरबा में आदिवासी महिला के नाम पर 23 एकड़ जमीन, बिलासपुर में बिल्डर के साथ पार्टनरशिप, माता भवरी देवी के नाम पर राजस्थान में फार्म हाउस, कोविड काल में बुक डिपो मालिकों को 2 करोड़ रुपये ब्याज पर देने और पत्नी के पास करोड़ों के सोने-हीरे के जेवर होने के आरोप हैं। बेटे की शादी में भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका (डब्ल्यू.पी.सी. 41/2026) में मांग की गई है कि वर्तमान जांच समिति के दोनों सदस्यों को तत्काल हटाया जाए। इसकी जगह वरिष्ठ आईएएस और महिला आईएएस अधिकारी की नई समिति गठित कर नए सिरे से विभागीय जांच हो। बैंक खातों, एफडी और लॉकर की जांच कर आरोपी आईपीएस रतनलाल डांगी को सेवा से बर्खास्त किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को तय की
गई है।