
रायपुर. छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल और डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सेवाएं दे रहे सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। आलम यह है कि पिछले 5 सालों से अलग कैडर बनाने और वेतन वृद्धि की मांग कर रहे इन डॉक्टरों की फाइलें मंत्रालय के चक्कर काट रही हैं।
अफसरशाही का बेतुका रवैया इस कदर हावी है कि 8 साल पहले तैयार किया गया कैडर प्रस्ताव अब भी कागजों में दबा पड़ा है। अधिकारी यह तक तय नहीं कर पा रहे हैं कि प्रदेश के टर्सरी केयर सेंटर्स (आंबेडकर व डीकेएस अस्पताल) में तैनात वरिष्ठ विशेषज्ञों का वेतनमान और कैडर ढांचा क्या होना चाहिए।
1. विसंगति: स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट एक ही तराजू में
राज्य शासन ने अब तक सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों के लिए कोई अलग कैडर गठित नहीं किया है। नतीजा यह है कि एमबीबीएस के बाद 3 साल की पढ़ाई (एमडी/एमएस) करने वाले सामान्य स्पेशलिस्ट और उसके बाद 3 साल का अतिरिक्त कठिन सुपर स्पेशियलिटी (डीएम/एमसीएच) कोर्स करने वाले डॉक्टरों को एक ही कैडर में रखा गया है।
* समान प्रमोशन व वेतन: सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को भी सामान्य स्पेशलिस्ट की तर्ज पर ही वेतन, भत्ते और प्रमोशन दिए जा रहे हैं।
* इलाज पर असर: इस नीतिगत विसंगति के कारण नए सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर सरकारी सेवाओं में जॉइन करने से कतरा रहे हैं। इसका सीधा नुकसान गंभीर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
2. संस्थाओं के बीच वेतन का भारी अंतर (लाख रुपए में)
प्रदेश के अलग-अलग सरकारी मेडिकल संस्थानों में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के वेतनमान में भारी असमानता देखने को मिल रही है:
एक ही राज्य और एक ही विभाग के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों में डॉक्टरों के वेतन का यह अंतर अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
3. मंत्रालय में 'क्वेरी-क्वेरी' का खेल: केवल 2 करोड़ का अतिरिक्त भार
डॉक्टरों का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सचिव, कमिश्नर और डायरेक्टर तक से कई दौर की मुलाकातें हो चुकी हैं। लेकिन हर बार मंत्रालय के अफसर फाइल पर बेतुकी क्वेरी (आपत्तियां) लगाकर उसे वापस भेज देते हैं। हाल ही में चिकित्सा शिक्षा विभाग के तत्कालीन अवर सचिव सोनचंद साहू ने भी फाइल वापस लौटा दी।
* आंकड़ों का सच: डॉक्टरों के अनुसार, आंबेडकर, एसीआई और डीकेएस अस्पतालों के नियमित व संविदा सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का वेतन बढ़ाने से राज्य सरकार के खजाने पर सालाना महज ₹2 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। फिर भी इसे लटकाया जा रहा है।
* अधिकारियों का गलत वेतनमान: पिछले साल कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय ने गलत वेतनमान का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। डॉक्टरों की आपत्ति के बाद सुधार का आश्वासन तो मिला, लेकिन नतीजा अब भी शून्य है।
अफसर बोले: प्रक्रिया जारी है, सटीक जानकारी नहीं
"सुपर स्पेशलिटी डॉक्टरों के कैडर निर्माण और वेतन वृद्धि को लेकर शासन स्तर पर प्रक्रिया जारी है। वर्तमान में फाइल किस स्थिति में है, इसकी सटीक जानकारी मुझे नहीं है।"
डॉ. यू.एस. पैकरा, संचालक चिकित्सा शिक्षा (DME)
