सरगुजा: सरगुजा जिले के सुदूर ग्रामीण इलाके सुलपगा गांव में एक ऐसी शादी देखने को मिली, जिसने पारंपरिक रीति-रिवाजों की परिभाषा ही बदल दी। यहां दुल्हन देवमुनि एक्का खुद बारात लेकर दूल्हे बिलासुस बरवा के घर पहुंची और शादी के बाद दूल्हे की विदाई हुई। इस अनोखे आयोजन में कन्यादान की जगह ‘वरदान’ की रस्म निभाई गई, जिसने पूरे इलाके में इस विवाह को चर्चा का विषय बना दिया। भावुक माहौल तब बना जब विदाई के दौरान दूल्हा खुद फूट-फूट कर रो पड़ा।

इस अनोखी शादी के पीछे एक पारिवारिक जरूरत और सामाजिक सोच जुड़ी है। दुल्हन के पिता मोहन एक्का के घर कोई बेटा नहीं है और वे खेती-किसानी पर निर्भर हैं। परिवार के सहारे के लिए उन्होंने अपनी बेटी की शादी इस तरह करने का फैसला लिया, जिसमें दूल्हा उनके घर आकर बेटे की भूमिका निभाए। शादी पूरी तरह स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई, जहां लड़की पक्ष बारात लेकर गया और दूल्हे को अपने साथ विदा कराकर लाया गया।

दूल्हा पक्ष ने भी इस परंपरा को सहर्ष स्वीकार किया। दूल्हे के परिवार की ओर से बताया गया कि यह उनके लिए नया अनुभव है, लेकिन सामाजिक और पारिवारिक जरूरत को देखते हुए उन्होंने इस रिश्ते को मंजूरी दी। गांव के लोगों के अनुसार, यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में कोई दूल्हा शादी के बाद सीधे घर जमाई बनकर गया है। मेहमानों और ग्रामीणों ने इसे बदलते सामाजिक मूल्यों और जरूरतों के अनुरूप एक सकारात्मक पहल बताया।

मैनपाट क्षेत्र सहित सरगुजा अंचल में घर जमाई की परंपरा पहले से मौजूद रही है, लेकिन इस तरह दुल्हन द्वारा बारात ले जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। यहां “चुमान” जैसी रस्में भी निभाई जाती हैं, जिसमें बाद में दूल्हा पक्ष की ओर से उपहार दिए जाते हैं। यह शादी न केवल एक परिवार की जरूरत को पूरा करती है, बल्कि समाज में बदलती सोच और परंपराओं के नए स्वरूप को भी दर्शाती है, जो अब लोगों के बीच चर्चा और प्रेरणा का विषय बन गई है।