
वायनाड। देश के कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच केरल के वायनाड जिले से एक बड़ा हादसा सामने आया है। आज कल्लाडी क्षेत्र में सुरंग (टनल) निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन ने निर्माण कार्य को पलभर में मलबे में तब्दील कर दिया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए। इसके अलावा कई मजदूरों के मलबे में फंसे या लापता होने की आशंका के चलते बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
यह दुर्घटना मीनाक्षी पुल के समीप उस स्थान पर हुई, जहां मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली टनल परियोजना पर काम चल रहा था। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा अचानक निर्माण स्थल पर आ गिरा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
भारी बारिश के बीच अचानक टूटी पहाड़ी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले कई घंटों से लगातार तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान निर्माण स्थल के ऊपर की ढलान से अचानक बड़ी मात्रा में मलबा नीचे आ गया। घटना इतनी तेजी से हुई कि वहां मौजूद श्रमिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने का मौका तक नहीं मिला। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव एजेंसियों को सूचना दी गई। राहत दल मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। घायल लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।-1783410730248.jpg)
राहत अभियान में जुटीं कई एजेंसियां
घटना के बाद पुलिस, अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में लगी हुई हैं। मलबे की गहराई और लगातार हो रही बारिश के कारण अभियान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मीनांगडी और कोझिकोड से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की दो टीमें, जिनमें करीब 60 जवान शामिल हैं, घटनास्थल पर भेजी गई हैं। आवश्यकता पड़ने पर सेना की सहायता लेने की भी तैयारी की गई है। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ की समीक्षा
हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की। उन्होंने वायनाड के जिला कलेक्टर से फोन पर बातचीत कर राहत कार्यों की जानकारी ली और प्रभावित क्षेत्र में हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने संबंधित मंत्रियों और जिला प्रशासन को मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान की निगरानी करने के निर्देश भी दिए। सरकार का कहना है कि घायलों के इलाज और राहत कार्य में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
निर्माण कंपनी पर भी उठे सवाल
राज्य के प्रभारी मंत्री टी. सिद्दीकी ने भी निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने पहले ही संभावित भूस्खलन के खतरे को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन सुरक्षा संबंधी जरूरी कदम समय पर नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में निर्देशों की अनदेखी की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वायनाड की पुरानी त्रासदी भी आई याद
इस हादसे ने एक बार फिर वायनाड में हुई पिछली भूस्खलन त्रासदियों की याद ताजा कर दी है। क्षेत्र पहले भी भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं का सामना कर चुका है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में चल रही निर्माण परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाना बेहद जरूरी है। फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, घायलों का उपचार सुनिश्चित करना और प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाना है। वहीं, हादसे के कारणों की विस्तृत जांच भी शुरू कर दी गई है।