.webp)
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्र शुरू होने से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज 7 जुलाई की शाम 7 बजे नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में भाजपा विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। विधायक दल के सचिव की ओर से सभी भाजपा विधायकों को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक आगामी विधानसभा सत्र में सरकार की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम होगी।
सरकार के अहम एजेंडे पर होगा मंथन
बैठक में 13 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार की कार्ययोजना और रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सदन में विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों, सरकार के जवाब, विभागवार तैयारियों और विभिन्न विधायी कार्यों को लेकर मंथन होगा। साथ ही सरकार की प्राथमिकताओं, विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से सदन में रखने की रणनीति भी तैयार की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में सभी मंत्रियों और विधायकों को अपने-अपने विभागों और विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों की पूरी तैयारी के साथ सदन में उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े लंबित मामलों, नई घोषणाओं और महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
विपक्ष के हमलों का जवाब देने की बनेगी रणनीति
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में भाजपा विधायक दल की इस बैठक में विपक्ष के संभावित आरोपों और सवालों का तथ्यात्मक एवं प्रभावी जवाब देने की रणनीति तैयार की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सदन के भीतर उसके सभी विधायक एकजुट होकर सरकार का पक्ष मजबूती से रखें।
13 से 17 जुलाई तक चलेगा विधानसभा का मानसून सत्र
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार 6 जुलाई को राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मुलाकात की थी। इसके बाद अब विधायक दल की बैठक को विधानसभा सत्र की तैयारियों का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई तक आयोजित होगा। इस दौरान कुल पांच बैठकें होंगी, जिनमें प्रश्नकाल, शून्यकाल, वित्तीय एवं अन्य शासकीय कार्यों के साथ विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आमने-सामने नजर आ सकते हैं।