मुंगेली जिले में किसानों के लिए 28 फरवरी 2026 का दिन खास रहा। कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को अंतर राशि का भुगतान शुरू हुआ।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर जिले के ग्राम रहंगी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेशभर के किसानों के खातों में 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से राशि ट्रांसफर की।

मुंगेली जिले में इस योजना के तहत 1 लाख 05 हजार 700 से अधिक किसानों के खातों में 387 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जाएगी। यह आंकड़ा प्रशासन ने आधिकारिक कार्यक्रम में साझा किया।



तीन विकासखंडों में आयोजित हुआ समारोह

कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिले के तीन स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए:

  • मुंगेली – कृषि उपज मंडी परिसर
  • लोरमी – मानस मंच
  • पथरिया – वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय

इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। उत्साह साफ नजर आया। जब पैसा सीधे खाते में पहुंचे, तो मुस्कान भी सीधी और साफ दिखती है।


Direct Benefit Transfer से बढ़ा भरोसा

सरकार ने राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की। इससे पारदर्शिता बढ़ती है और बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है।

भारत सरकार और राज्य सरकारें पिछले कुछ वर्षों से Direct Benefit Transfer (DBT) मॉडल को प्राथमिकता दे रही हैं। नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट्स भी बताती हैं कि DBT से लीकेज कम होता है और लाभ सीधे पात्र व्यक्ति तक पहुंचता है।

मुंगेली में भी यही मॉडल अपनाया गया।


मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्य कार्यक्रम से प्रदेशभर के किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अंतर राशि का भुगतान किसानों को आर्थिक मजबूती देगा।

किसान जब मजबूत होंगे, तो गांव मजबूत होंगे। और गांव मजबूत होंगे, तो राज्य भी मजबूत होगा। गणित सरल है।


विधायक पुन्नूलाल मोहले का संबोधन

मुंगेली विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि सहायता राशि सीधे खाते में पहुंचने से किसानों के चेहरों पर खुशी दिख रही है। उन्होंने किसानों को होली की शुभकामनाएं भी दीं।

उन्होंने किसानों को धान के साथ दलहन और तिलहन की खेती अपनाने की सलाह दी। विविध फसल प्रणाली से आय बढ़ती है। कृषि विशेषज्ञ भी यही सुझाव देते हैं।


किसान समृद्धि और अन्य योजनाएं

विधायक मोहले ने किसान समृद्धि योजना के तहत प्रतिवर्ष 6000 रुपये की सहायता का भी उल्लेख किया।

सरकार कई योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहयोग दे रही है। लेकिन असली फायदा तब मिलेगा जब किसान जानकारी लेकर सक्रिय रूप से आवेदन करें।

योजनाएं कागज पर नहीं, खेत पर दिखनी चाहिए।


जिला प्रशासन की भूमिका

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पांडेय ने कहा कि सरकार किसानों के हित में लगातार कार्य कर रही है।

अपर कलेक्टर श्रीमती निष्ठा पांडेय तिवारी ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।

जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय ने जानकारी दी कि जिले में धान खरीदी बिना बड़ी समस्या के संपन्न हुई।

यह समन्वय प्रशासन और किसानों दोनों के प्रयास से संभव हुआ।


387 करोड़ की राशि: जिले के लिए क्या मतलब?

387 करोड़ 57 लाख रुपये कोई छोटी राशि नहीं है।

जब इतनी बड़ी रकम सीधे किसानों के खातों में जाती है, तो स्थानीय बाजार में भी आर्थिक गतिविधि बढ़ती है।

कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में नकदी प्रवाह का सीधा असर ग्रामीण व्यापार पर पड़ता है।

होली से पहले यह राशि पहुंचना किसानों के लिए दोहरी खुशी जैसा है।


कार्यक्रम की शुरुआत और सम्मान

कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन से हुई।

इसके बाद अतिथियों ने चयनित किसानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

पूरे कार्यक्रम में उत्साहपूर्ण वातावरण रहा। किसानों ने शासन और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।


धान से आगे सोचने की जरूरत

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि एक ही फसल पर निर्भरता जोखिम बढ़ाती है।

दलहन और तिलहन जैसी फसलें मिट्टी की सेहत सुधारती हैं और बाजार में बेहतर दाम दिला सकती हैं।

फसल विविधीकरण केवल सलाह नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति है।


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क्या कहता है डेटा?

राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम विवरण के अनुसार:

  • 1,05,700+ किसान लाभान्वित
  • 3100 रुपये प्रति क्विंटल अंतर राशि
  • 387 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक कुल भुगतान

ये आंकड़े सार्वजनिक मंच से साझा किए गए।

विश्वसनीयता के लिए सरकारी कार्यक्रम और प्रशासनिक बयानों को प्राथमिक स्रोत माना गया है।


किसानों के लिए आगे क्या?

किसानों को चाहिए कि वे:

  • बैंक खाते सक्रिय रखें
  • आधार और बैंक लिंकिंग सुनिश्चित करें
  • कृषि विभाग से नियमित संपर्क रखें
  • फसल विविधीकरण अपनाएं

सरकारी योजना तभी सफल होती है जब लाभार्थी जागरूक हो।