रायपुर। जिले में सरकारी खजाने में सेंधमारी का बड़ा अजब खेल सामने आया है। राशन दुकानों में गरीबों का चावल तो बंट गया, लेकिन जिन बोरियों में वह चावल आया था, उन्हें ही राशन वाले डकार गए। पूरा मामला 2 करोड़ 75 लाख रुपए के बारदानों (बोरियों) के गोलमाल का है।

नागरिक आपूर्ति निगम के ऑफिस से अप्रैल से अगस्त महीने के बीच जिले की 720 पीडीएस (राशन) दुकानों को करीब 10 लाख नग बारदाने भेजे गए थे। कायदा यह है कि राशन बांटने के बाद खाली बोरी वापस करनी होती है। लेकिन जब हिसाब-किताब की बारी आई, तो बाबू लोगों के पसीने छूट गए। 10 लाख में से सिर्फ 5 लाख बोरियां ही विभाग को लौटाई गईं। बाकी 5 लाख बारदानों को मानो जमीन खा गई या आसमान निगल गया।

251 दुकानदारों ने दिखाई ढिठाई, कुछ नहीं लौटाया

सबसे ज्यादा ताज्जुब तो इस बात का है कि जिले के 251 दुकानदारों ने पूरी ढिठाई दिखाते हुए बोरी का एक टुकड़ा तक वापस नहीं किया। इनकी वापसी का आंकड़ा शून्य है। मतलब करीब 35 प्रतिशत दुकानों ने सारा का सारा बारदाना ही हजम कर लिया। बाकी बचे 469 दुकानदारों ने जैसे-तैसे 5 लाख नग लौटाए हैं।

खजाने पर ऐसे पड़ रही तगड़ी चपत

अब समझिए कि इस गोलमाल से सरकारी खजाने पर कैसे चोट पड़ती है। पीडीएस से वापस आने वाले इन्हीं पुराने बारदानों से धान खरीदी का बड़ा काम निपटाया जाता है। जब राशन वाले पुरानी बोरी लौटाते हैं, तो उन्हें इसके एवज में 25 रुपए प्रति बोरी दिए जाते हैं। पर जब ये बोरियां गायब कर दी जाती हैं, तो सरकार को मजबूरी में नई बोरी खरीदनी पड़ती है। बाजार में नई बोरी का भाव 50 से 55 रुपए प्रति नग बैठता है। इस गणित से देखें, तो जो 5 लाख बोरियां गायब हैं, उनकी कुल कीमत 2 करोड़ 75 लाख रुपए तक पहुंच जाती है।

नोटिस का भी नहीं दे रहे जवाब

बड़ा मुद्दा यह है कि आखिर इतनी भारी तादाद में बारदाने गए कहां? क्या इन्हें दुकानों के गोदामों में सड़ा दिया गया? या फिर औने-पौने दाम पर बाजार में खपा कर अपनी जेबें गरम कर ली गई हैं?

लापरवाही की इंतहा देखिए कि जब विभाग ने इन राशन वालों से जवाब-तलब किया और नोटिस थमाया, तो उन्होंने जवाब देने की जहमत तक नहीं उठाई।

नागरिक आपूर्ति निगम के डीएमओ जशवीर सिंह बघेल का कहना है कि जिन दुकानों से बारदाना वापस नहीं आया है, वहां नोटिस भेजा गया है। तय समय पर बारदाने नहीं लौटाए गए, तो नियमों के तहत कड़ा एक्शन लिया जाएगा।