छत्तीसगढ़ में आरटीई फीस बढ़ोतरी की मांग को लेकर निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन जारी है। शनिवार को प्रदेश के सभी निजी स्कूल बंद रहेंगे। यह निर्णय छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा लिया गया है। पिछले 14 साल से आरटीई के तहत दी जा रही फीस में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जिसके चलते स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन इसके साथ ही निजी स्कूलों द्वारा प्राप्त प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग की जा रही है। इस मुद्दे पर निजी स्कूलों ने 1 मार्च से असहयोग आंदोलन शुरू किया था, और अब स्थिति यह है कि 18 अप्रैल को प्रदेश भर के 5 हजार से अधिक स्कूल बंद रहेंगे।
पिछले कई महीनों से निजी स्कूल संचालक, शिक्षक और स्टाफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। शुक्रवार को, स्कूलों के संचालकों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस आंदोलन का मुख्य कारण यह है कि आरटीई के तहत दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि में पिछले 14 वर्षों से कोई वृद्धि नहीं हुई है। वर्तमान में, कक्षा पहली से पांचवीं तक के लिए 7,000 रुपए और छठी से आठवीं तक 11,400 रुपए प्रति छात्र हर साल दिया जाता है।
यह आंदोलन 1 मार्च 2023 से शुरू हुआ, लेकिन अब यह गंभीर रूप ले चुका है। 18 अप्रैल को सभी निजी स्कूल बंद रहेंगे, जिससे लाखों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब सरकार ने आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इस मुद्दे पर छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता और सचिव मोती जैन ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों की अनदेखी की है। उन्होंने बताया कि शिक्षा संचालन की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आरटीई के तहत पात्र छात्रों को बिना किसी रुकावट के स्कूलों में प्रवेश दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्कूलों ने सहयोग नहीं किया तो उनकी मान्यता निरस्त की जा सकती है।

