
बिलासपुर।छत्तीसगढ़ पुलिस का स्लोगन है 'परित्राणाय साधूनां' यानी सज्जनों की रक्षा के लिए। लेकिन बिलासपुर जिले के रतनपुर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खाकी की कार्यप्रणाली और नए अधिकारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां न्याय की गुहार लगाने थाने पहुंचे एक पीड़ित को न्याय तो नहीं मिला, बल्कि थाना प्रभारी के प्रभार में बैठीं एक महिला प्रशिक्षु (ट्रेनी) आईपीएस ने ही उसके साथ कथित तौर पर मारपीट कर दी। आरोप है कि मैडम का गुस्सा इतना भयंकर था कि फरियादी को पीटते वक्त उनके हाथ से उनकी घड़ी तक छिटक कर दूर जा गिरी।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना दिनांक 12 अप्रैल 2026 की रात की है। रतनपुर निवासी प्रार्थी संतोष राव जाधव (पिता- बाबू लाल जाधव) अपने साथ हुई एक मारपीट की शिकायत दर्ज कराने रतनपुर थाने पहुंचे थे। संतोष का आरोप था कि शिवशंकर कश्यप और राम मिलन नामक व्यक्तियों ने उनके साथ बेवजह मारपीट की है। पीड़ित इसी बात की एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस से न्याय मांगने के इरादे से थाने की दहलीज पर गया था।
शराब पीने का आरोप लगा जड़ दिए थप्पड़
घटना रात करीब 8:30 बजे से 9:15 बजे के बीच की बताई जा रही है। जब पीड़ित संतोष अपनी शिकायत लेकर ड्यूटी पर मौजूद महिला प्रशिक्षु आईपीएस के पास पहुंचा, तो मैडम उसकी फरियाद सुनने के बजाय उसी पर भड़क गईं। पीड़ित का आरोप है कि महिला आईपीएस ने उस पर शराब पीकर थाने आने का आरोप लगाया। इसके बाद बिना किसी मेडिकल जांच या पूछताछ के, उन्होंने कथित तौर पर आपा खो दिया और संतोष के साथ मारपीट शुरू कर दी।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षु आईपीएस ने इतनी जोर से थप्पड़ और मुक्के जड़े कि इस झटके में मैडम की अपनी कलाई की घड़ी भी टूटकर दूर जा गिरी। जो व्यक्ति बाहर के लोगों से पिटने के बाद पुलिस से सुरक्षा की उम्मीद कर रहा था, उसे खुद थाने के भीतर खाकी के हाथों पिटना पड़ा।
सीसीटीवी कैमरे में कैद है पूरी घटना
इस घटना के बाद से पीड़ित और उसके परिजन भयभीत है। और फरियादी पक्ष कुछ भी कहने से बच रहा है ।
पीड़ित अब कहने लगा है कि अब सब ठीक है, मुझे कोई समस्या नहीं है ।
सूत्र बताते हैं जिस वक्त प्रशिक्षु आईपीएस ने इस घटना को अंजाम दिया, थाने के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरे चालू थे। रात 8.30 से 9.15 के बीच की पूरी घटना और मैडम की कथित 'गुंडागर्दी' थाने के सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से कैद है। यदि निष्पक्षता से उन कैमरों की डीवीआर जब्त कर जांच की जाए, तो सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
इस पूरी घटना ने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस अकादमी में युवा अधिकारियों को फरियादियों के साथ ऐसा सुलूक करने की ट्रेनिंग दी जाती है? यदि प्रार्थी शराब के नशे में था भी, तो कानूनन उसका मुलाहिजा (मेडिकल) कराया जाना चाहिए था और नियमानुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन कानून के रक्षकों द्वारा खुद कानून हाथ में लेकर पीटना कहां का न्याय है?

