
जल संसाधन विभाग का कारनामा: जांच लंबित रहने के दौरान ही सहायक से अधीक्षण अभियंता बने, शासन को गुमराह कर केस भी करवाया बंद, अब मुख्य सचिव से शिकायत
बिलासपुर। जिले के कोटा विकासखंड में अरपा नदी पर जनता की गाढ़ी कमाई के 7.50 करोड़ रुपए की लागत से बना चांटापारा-II एनीकट कम काजवे निर्माण के कुछ ही वर्षों में पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है। इस भारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ACB) की एफआईआर में आरोपी क्रमांक 4 रहे तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (SDO) आई.ए. सिद्दीकी को कार्रवाई के बजाय इनाम दिया गया। एफआईआर लंबित रहने के दौरान ही विभाग ने उन्हें दो बार पदोन्नत किया और आज वे मुख्य अभियंता (CE) के अहम प्रभार पर काबिज हैं। अब इस पूरे मामले में दस्तावेजों के साथ मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन से शिकायत कर सीबीआई जांच की मांग की गई है।
जल संसाधन विभाग ने साल 2009 में कोटा क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के नाम पर अरपा नदी पर एनीकट निर्माण के लिए 750.30 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 मार्च 2013 तक ठेकेदार को 710.28 लाख रुपए का भारी-भरकम भुगतान भी कर दिया गया। लेकिन निर्माण की गुणवत्ता इतनी स्तरहीन थी कि एनीकट कुछ ही समय में बार-बार क्षतिग्रस्त होने लगा।
खुद कार्यपालन अभियंता ने मानी थी अनुपयोगी होने की बात
मामले में सबसे बड़ा सबूत विभाग का ही एक पत्र है। जल संसाधन संभाग कोटा के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता ने 15 मार्च 2017 को एक आधिकारिक पत्र लिखकर साफ तौर पर स्वीकार किया था कि “राशि 710.28 लाख रुपए में निर्मित एनीकट पूर्णतया अनुपयोगी हो गया है।” हैरत की बात यह है कि एनीकट के अनुपयोगी घोषित होने के बाद भी ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से मरम्मत के नाम पर 40.44 लाख रुपए और निकाल लिए गए। यही नहीं, इसी एनीकट के लिए बाद में 355.36 लाख रुपए की एक नई तकनीकी स्वीकृति भी जारी कर दी गई, जो सीधे-सीधे सरकारी खजाने पर डाका डालने जैसा था।
दस्तावेज छिपाकर बंद करवा दी एसीबी की फाइल
इस खुले भ्रष्टाचार की शिकायत पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो/एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), रायपुर ने साल 2018 में अपराध क्रमांक 15/2018 दर्ज किया था। इस एफआईआर में तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी श्री इम्तियाज अली (आई.ए.) सिद्दीकी का नाम आरोपी क्रमांक 4 के रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज था। लेकिन जांच के दौरान विभाग के आला अफसरों ने एसीबी और शासन को जानबूझकर आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी भेजी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जरूरी तकनीकी दस्तावेज जांच एजेंसी को दिए ही नहीं गए। इसी का फायदा उठाते हुए एसीबी ने साल 2023 में मामले में खात्मा (क्लोजर रिपोर्ट) प्रतिवेदन पेश कर दिया। विभाग द्वारा दी गई भ्रामक जानकारी के आधार पर ही विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर ने 8 अक्टूबर 2025 को इस खात्मा रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।
नियमों को ताक पर रखकर दी गई पदोन्नतियां
शिकायत में विस्तार से बताया गया है कि इस पूरे घोटाले का सबसे बड़ा लाभार्थी आई.ए. सिद्दीकी को बनाया गया। सामान्य प्रशासन विभाग के नियम कहते हैं कि जिस अधिकारी के खिलाफ ईओडब्ल्यू या एसीबी में आपराधिक प्रकरण दर्ज हो, उसकी पदोन्नति रोक दी जाती है। लेकिन सिद्दीकी के मामले में नियम ताक पर रख दिए गए। एफआईआर में नामजद रहने के बावजूद उन्हें 28 जून 2023 को सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता (EE) के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। इसके बाद 25 फरवरी 2026 को उन्हें कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता (SE) बना दिया गया। वर्तमान में वे मुख्य अभियंता के पद का प्रभार संभाल रहे हैं।
एक नज़र में: प्रोजेक्ट के आंकड़े
- प्रशासकीय स्वीकृति: रु. 750.30 लाख (17 सितंबर 2009)
- ठेकेदार को भुगतान: रु. 710.28 लाख (25 मार्च 2013 तक)
- बेकार खर्च (मरम्मत): रु. 40.44 लाख
- नई तकनीकी स्वीकृति: रु. 355.36 लाख
- एसीबी अपराध क्र.: 15/2018
- खात्मा रिपोर्ट स्वीकार: 08 अक्टूबर 2025
मुख्य सचिव से की गई ये 4 प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ता ने शासन को भेजे गए 50 पन्नों में चार बड़ी मांगें रखी हैं:
- आरोपी इंजीनियर सिद्दीकी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
- भ्रष्टाचार के मामले में नामजद रहते हुए दी गई दोनों अवैध पदोन्नतियों को निरस्त किया जाए।
- अनुपयोगी एनीकट के निर्माण से शासन को हुए 7 करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति की वसूली जिम्मेदार अधिकारियों से की जाए।
- खात्मा रिपोर्ट को चुनौती देते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए।
मंत्रालय तलब कर सकता है पूरी फाइल
सूत्रों की मानें तो मुख्य सचिव कार्यालय में यह गंभीर शिकायत पहुंचने के बाद जल संसाधन विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जिस तरह से विभाग के ही अधिकारियों ने एसीबी से जानकारी छिपाकर अपने दागी इंजीनियर को बचाया और पदोन्नत किया, उसे लेकर मंत्रालय स्तर से एनीकट निर्माण से लेकर एसीबी के पत्राचार तक की पूरी फाइल तलब की जा सकती है। शासन इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट को री-ओपन करने के लिए विधिक राय भी ले सकता है।