
अटैचमेंट खत्म करने का दूसरा आदेश भी रहा बेअसर, सीएमएचओ दफ्तरों में जमे डॉक्टरों-कर्मचारियों की मनमानी पर अगले महीने से लगेगा ब्रेक
रायपुर। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और कर्मचारियों के मनमाने अटैचमेंट और फर्जी हाजिरी के खेल पर अगले महीने से पूर्ण रूप से लगाम लगने जा रही है। वर्तमान में विभाग में शिक्षा विभाग की तर्ज पर ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम तो लागू है, लेकिन इसके सॉफ्टवेयर को सीधे ट्रेजरी (कोषालय) से लिंक नहीं किया गया था। इसका फायदा उठाते हुए प्रदेशभर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) अपने चहेते डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को मूल पदस्थापना से हटाकर अपने दफ्तरों में अटैच किए हुए हैं। तकनीकी खामी के कारण अपनी पोस्टिंग वाली जगह से गायब रहने के बावजूद इन कर्मचारियों का वेतन नहीं कट रहा था। अब एनआईसी (NIC) के जरिए इस सिस्टम को सीधे ट्रेजरी से जोड़ा जा रहा है। अगले महीने से डॉक्टरों व अन्य स्टाफ को अनिवार्य रूप से उसी जगह के जियो-लोकेशन से हाजिरी दर्ज करनी होगी जहां उनकी मूल पोस्टिंग है। दूसरी जगह से हाजिरी मान्य नहीं होगी और गैरहाजिर रहने पर सीधे वेतन कटेगा।
सिस्टम की खामी का उठाया फायदा, अफसरों ने दबाई फाइलें
पड़ताल में सामने आया है कि सॉफ्टवेयर अपडेट न होने के कारण राज्य के ज्यादातर सीएमएचओ अटैचमेंट को पूरी तरह खत्म नहीं कर रहे थे। राजधानी रायपुर समेत कई जिलों के छोटे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में पदस्थ कर्मचारियों को नियम विरुद्ध तरीके से अन्य कार्यालयों में अटैच कर दिया गया। डॉक्टरों का जो समय मरीजों के इलाज में बीतना चाहिए था, वह सीएमएचओ दफ्तरों की फाइलों और विभागीय कामों में खप रहा है। वार्ड बॉय, स्वीपर और आया बाई जैसे कर्मचारियों से भी उनके मूल कार्यस्थल के बजाय दूसरे संस्थानों में काम लिया जा रहा है।
विधानसभा के आश्वासन और 22 सितंबर का आदेश हवा में
स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट खत्म करने की घोषणा इसी साल फरवरी-मार्च 2026 के विधानसभा सत्र में की जा चुकी है। इसके बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं ने दूसरा आदेश जारी किया। 22 सितंबर को जारी इस पत्र में तीन दिन के भीतर आश्वासनों के पालन का प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा गया था। देरी होने पर कारण बताओ नोटिस की चेतावनी भी दी गई थी। इस आदेश को जारी हुए करीब एक महीना बीत चुका है, लेकिन अटैचमेंट का यह सिंडिकेट अब भी जस का तस बना हुआ है।
राजनीतिक रसूख और दो दिन की छुट्टी का लालच
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सीएमएचओ कार्यालयों में स्टाफ की कमी दूर करने का बहाना बनाकर यह पूरा खेल चल रहा है। कई कर्मचारी अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर कार्यालयों में अटैचमेंट करा लेते हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण अस्पतालों की इमरजेंसी ड्यूटी से बचना और दफ्तरों में मिलने वाली सप्ताह में दो दिन की छुट्टी का लाभ उठाना है। इन अटैचमेंट की कोई भी नियमित जानकारी राज्य मुख्यालय को नहीं भेजी जाती। जब कोई शिकायत होती है या मुख्यालय जानकारी मांगता है, तभी अफसरों को इस मनमानी का पता चलता है।
पंडरी अस्पताल: पद ही नहीं, फिर भी 3 नेत्र सहायक अटैच
रायपुर के सीएमएचओ दफ्तर में 3 डॉक्टर अटैच हैं, लेकिन सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा पंडरी अस्पताल में मिला है। यहां तीन नेत्र सहायक लंबे समय से अटैच हैं, जबकि अस्पताल के सेटअप में नेत्र सहायक का कोई पद ही नहीं है। यहां आंखों की जांच या इलाज होता ही नहीं है, क्योंकि माना में आंखों का अलग अस्पताल खोला जा चुका है। इसके बावजूद इन तीनों कर्मचारियों को रिलीव नहीं किया गया है।
राजधानी ही नहीं, इन जिलों में भी फैला है नेटवर्क
अटैचमेंट का यह खेल सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं है। धमतरी, जगदलपुर, महासमुंद और दुर्ग जिले के स्वास्थ्य विभाग में भी डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ को सीएमएचओ कार्यालयों में अटैच किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन जिलों में औसतन 5 से 6 डॉक्टर व अहम कर्मचारी दफ्तरों में अटैच हैं, जिससे अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
एनआईसी ने शुरू किया सिस्टम अपडेट
स्वास्थ्य संचालनालय के निर्देश पर एनआईसी (NIC) ने हाजिरी सिस्टम को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी कर्मचारियों का पदस्थापना डाटा सर्वर पर फीड किया जा रहा है। ट्रेजरी से इंटीग्रेशन पूरा होते ही अगले महीने से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी, जिसके बाद अटैचमेंट वाले कर्मचारियों की सैलरी जनरेट होना स्वतः बंद हो जाएगी।