रायपुर। शहर में हजारों परिवार ऐसे हैं जो हर साल नगर निगम को टैक्स तो पूरा दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। राज्य शासन ने छह माह पहले रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम के हवाले करने की घोषणा की थी। लोगों को लगा था कि अब उनकी परेशानियां दूर होंगी, लेकिन इतने महीने बीत जाने के बाद भी यह प्रक्रिया सिर्फ विभागीय बैठकों तक सिमटी हुई है। जमीन पर अब तक न तो शासन की विस्तृत नियमावली जारी हुई है और न ही हैंडओवर की प्रक्रिया एक कदम भी आगे बढ़ सकी है।

वर्षों से खराब पड़ी हैं सड़कें और नालियां

इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अधिकांश कॉलोनियों में 15 से 20 वर्ष पुरानी पेयजल पाइपलाइन बिछी है, जो अब पुरानी हो चुकी है। नालियां जर्जर हो चुकी हैं और कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं हो रही है। क्षतिग्रस्त सड़कें लंबे समय से मरम्मत के इंतजार में हैं। खराब स्ट्रीट लाइट के कारण रात में परेशानी होती है। हजारों परिवार वर्षों से इन सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब वे हर साल निगम को कर (टैक्स) दे रहे हैं, तो बदले में उन्हें अपेक्षित नागरिक सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं।

वित्तीय बोझ के डर से अटका है हैंडओवर

नगर निगम बिना तकनीकी मूल्यांकन के इन कॉलोनियों को अपने हवाले नहीं करना चाहता, क्योंकि यह निगम के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित हो सकता है। कॉलोनियों की वर्तमान स्थिति का सर्वे होना आवश्यक है। नगर निगम, आरडीए और हाउसिंग बोर्ड की संयुक्त सर्वे टीम को कॉलोनियों का वास्तविक आकलन करना है, लेकिन यह सर्वे अब तक शुरू ही नहीं हो सका है।

इन इलाकों के लोगों को है इंतजार

जिन कॉलोनियों का हैंडओवर होना है, उनमें कौशल्या माता विहार, कर्मा परिसर (भक्त माता कर्मा परियोजना क्षेत्र), बोरिया खुर्द, सेजबहार एवं आसपास की आरडीए आवासीय योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा अटल नगर के कुछ सेक्टर, सड्डू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, दलदल सिवनी, भाठागांव हाउसिंग बोर्ड एवं आसपास के विकसित क्षेत्र और पुरानी आरडीए आवासीय योजनाओं के विभिन्न सेक्टरों का भी हैंडओवर किया जाना है।

तकनीकी सर्वे से तय होगा खर्च और कर्मचारियों की जरूरत

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, शासन से आदेश मिलने के बाद संयुक्त टीम सभी कॉलोनियों का तकनीकी सर्वे करेगी। इसमें पेयजल आपूर्ति तंत्र, सीवरेज नेटवर्क, आंतरिक सड़कें, स्ट्रीट लाइट, उद्यान, नालियां और सफाई व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि कॉलोनियों के रखरखाव के लिए कितने अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कितना वित्तीय भार आएगा और किन आधारभूत संरचनाओं का पहले सुधार किया जाना जरूरी है।

इस बारे में रायपुर नगर निगम के मुख्य अधीक्षण अभियंता संजय बागड़े का कहना है कि हैंडओवर के संबंध में पूर्व में बैठकें हुई हैं। लेकिन अब तक सर्वे का काम नहीं हो पाया है। दोनों विभागों की संयुक्त सलाह पर जल्द ही यह सर्वे करवाया जाएगा।