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WhatsApp ने अपने बिजनेस प्लेटफॉर्म के लिए नया प्राइसिंग मॉडल पेश किया है, जो थर्ड-पार्टी AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है. नए नियमों के तहत 1 अक्टूबर से ChatGPT, Claude, Mistral, Qwen और अन्य बाहरी AI मॉडल्स के जरिए होने वाली बातचीत के लिए बिजनेस अकाउंट्स को पहले की तुलना में कहीं अधिक भुगतान करना पड़ सकता है. वहीं, Meta AI का इस्तेमाल करने वाले व्यवसायों को अपेक्षाकृत कम खर्च उठाना होगा. फिलहाल WhatsApp AI एजेंट्स के उपयोग के लिए अलग से कोई शुल्क नहीं लेता, लेकिन नया प्राइसिंग मॉडल थर्ड-पार्टी AI सेवाओं को महंगा बना देगा.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, WhatsApp के अपडेटेड डेवलपर डॉक्यूमेंटेशन के आधार पर तैयार किए गए एक सैंपल कैलकुलेशन में बताया गया है कि 10,000 जटिल AI मैसेज प्रोसेस करने पर थर्ड-पार्टी मॉडल्स का खर्च लगभग 968 डॉलर (करीब 92 हजार रुपये) तक पहुंच सकता है. वहीं, यही काम Meta AI के जरिए करने पर अनुमानित लागत 400 से 500 डॉलर (करीब 38 से 48 हजार रुपये) के बीच रहेगी. यानी Meta AI और बाहरी AI मॉडल्स के बीच लागत का अंतर काफी बड़ा हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों और स्टार्टअप्स पर पड़ेगा, जिन्होंने अपने बिजनेस चैटबॉट्स ChatGPT, Claude या अन्य लोकप्रिय AI मॉडल्स पर तैयार किए हैं. उनका कहना है कि यह कदम कंपनियों को Meta AI अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है, जबकि कई व्यवसायों को अपनी मौजूदा AI रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है. कुछ उद्योग विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बढ़ती लागत के कारण कुछ व्यवसाय WhatsApp Business के बजाय दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर सकते हैं.
नई टोकन-बेस्ड प्राइसिंग को लेकर भी कंपनियों में चिंता है. AI बातचीत जितनी लंबी और जटिल होगी, टोकन की खपत उतनी ही बढ़ेगी और बिल भी तेजी से बढ़ सकता है. ऐसे में विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि कंपनियां AI उपयोग की स्पष्ट रणनीति बनाएं, खर्च की निगरानी करें, अलर्ट सिस्टम और फॉलबैक नियम तय करें तथा यह मूल्यांकन करें कि किन परिस्थितियों में AI ऑटोमेशन वास्तव में फायदेमंद है और कब सामान्य वर्कफ़्लो बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.