
रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में जांच एजेंसियों ने अपनी गिरफ्त और मजबूत कर ली है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और एसीबी-ईओडब्ल्यू के रडार पर अब सीधे तौर पर राजस्व विभाग के अधिकारी आ गए हैं। रायपुर, महासमुंद, दुर्ग और बलौदाबाजार जिले के 30 से ज्यादा पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अफसरों से लगातार पूछताछ की जा रही है। इस तेज होती कार्रवाई ने पूरे राजस्व महकमे की नींद उड़ा दी है।
इस मामले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट वह अधूरी जांच है, जिसने अब पुराने जांचकर्ताओं की ही मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल, मामले की शुरुआती शिकायत 52 खसरों में गड़बड़ी को लेकर हुई थी, लेकिन तब केवल 12 खसरों की ही जांच की गई। महज इन 12 मामलों में ही 43 करोड़ 11 लाख रुपये के बड़े घपले का पर्दाफाश हो गया था। अब ईओडब्ल्यू यह पता लगा रही है कि बाकी खसरों की फाइलें किस स्तर पर और किसके दबाव में दबाई गईं। इसी सिलसिले में अभनपुर के तत्कालीन तहसीलदार को भी कई बार तलब किया जा चुका है।
एजेंसियों का फोकस उन जमीनों पर है जिनकी खरीदी-बिक्री, बंटवारा और नामांतरण भारतमाला परियोजना की घोषणा से ठीक पहले रातों-रात किए गए। इस खेल को समझने के लिए अफसरों से मूल पंचनामा, मुआवजा निर्धारण और खसरा रिकॉर्ड के तमाम दस्तावेज तलब किए जा रहे हैं।
इस महाघोटाले में अब तक 7 पटवारियों, जमीन दलालों और एक जनप्रतिनिधि समेत 25 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। वहीं एक राजस्व निरीक्षक अब भी फरार है जिसकी सरगर्मी से तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों और अफसरों के करीबियों से मिले इनपुट के बाद पैसों के लेन-देन का पूरा नेटवर्क जांच एजेंसियों के हाथ लग चुका है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इन्हीं पुख्ता सबूतों के आधार पर आने वाले दिनों में कई रसूखदार नेताओं और बड़े अधिकारियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे पड़ सकते हैं।