
ग्रीन टी के बाद अब माचा टी (Matcha Tea) तेजी से लोगों की पसंद बनती जा रही है. जापान से शुरू हुई यह हरे रंग की पाउडर वाली चाय अब भारत में भी लोकप्रिय हो रही है. हाल ही में असम ने माचा का व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की घोषणा की है, जिससे इसकी चर्चा और बढ़ गई है. माचा को एंटीऑक्सीडेंट्स और कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होती. कुछ लोगों में इसका सेवन फायदे की बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, माचा टी में सामान्य ग्रीन टी की तुलना में अधिक मात्रा में कैफीन और कैटेचिन पाए जाते हैं, क्योंकि इसमें केवल चाय का अर्क नहीं बल्कि पूरी पत्ती का पाउडर इस्तेमाल किया जाता है. जिन लोगों को चाय या कॉफी पीने के बाद घबराहट, बेचैनी, हाथ कांपना, एसिडिटी, दिल की धड़कन तेज होना या नींद न आने जैसी समस्या होती है, उन्हें माचा टी का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. यदि पीना ही हो तो इसे सीमित मात्रा में और सुबह या दोपहर तक ही लेना बेहतर माना जाता है.
डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों को अनिद्रा (Insomnia) की समस्या रहती है, उन्हें भी माचा टी से सावधानी बरतनी चाहिए. इसमें मौजूद एल-थीनिन (L-Theanine) मानसिक शांति और फोकस बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन कैफीन की अधिक मात्रा शाम या रात में सेवन करने पर नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है.
अगर किसी व्यक्ति को आयरन की कमी (Iron Deficiency) या एनीमिया है, तो माचा टी को भोजन के साथ नहीं पीना चाहिए. इसमें मौजूद कैटेचिन शरीर में भोजन से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं, जिससे आयरन की कमी और बढ़ सकती है. ऐसे लोगों को माचा और भोजन के बीच पर्याप्त अंतर रखना चाहिए.
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, हृदय रोग से पीड़ित लोग या नियमित दवाएं लेने वाले मरीज माचा टी को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. माचा टी एक हेल्दी ड्रिंक हो सकती है, लेकिन इसका लाभ तभी मिलता है जब इसे सही मात्रा में और अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर पिया जाए.