रायपुर।कहते हैं जब इंसान के पाप का घड़ा भर जाता है, तो ईश्वरीय दरबार में भी उसकी कोई मन्नत काम नहीं आती। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 540 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले में भी ठीक ऐसा ही देखने को मिला। पिछले तीन सालों से कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल आखिरकार ईओडब्ल्यू (EOW) के शिकंजे में आ गए हैं। इस गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी बेहद दिलचस्प है। पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए करोड़ों के घोटाले का यह आरोपी देश भर के मंदिरों की खाक छान रहा था और अपनी सलामती के लिए 'विशेष अनुष्ठान' करा रहा था।

गिरफ्तारी के डर से 'तीर्थयात्रा' पर निकले रामगोपाल

पूछताछ में जो प्रारंभिक खुलासे हुए हैं, वे हैरान करने वाले हैं। रायपुर से भागने के बाद रामगोपाल अग्रवाल ने सबसे पहले ओडिशा का रुख किया। वहां पुरी और भुवनेश्वर के रिसॉर्ट्स में छिपकर रहे और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कराई। जब वहां सुरक्षित महसूस नहीं हुआ तो उनका अगला ठिकाना उत्तर प्रदेश बना। काशी (वाराणसी) और प्रयागराज जैसे पवित्र शहरों में भी उन्होंने भगवान की शरण ली। इसके बाद उनका यह 'अंडरग्राउंड' सफर तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और दिल्ली तक चलता रहा। हालांकि, इस फरारी के दौरान भी उनका नेटवर्क सक्रिय था। वे लगातार अपने परिवार, प्रदेश के कुछ बड़े नेताओं और रसूखदार कारोबारियों के संपर्क में बने हुए थे।

बेटे को उठाया तो टूट गया तिलिस्म

रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ विशेष अदालत से स्थायी वारंट जारी हो चुका था। EOW की टीमें लगातार छापेमारी कर रही थीं, लेकिन वे हाथ नहीं आ रहे थे। ऐसे में EOW ने अपनी रणनीति बदली और दबाव बनाने के लिए मंगलवार को रामगोपाल के बेटे वैभव अग्रवाल को हिरासत में ले लिया। वैभव से लगातार दो दिनों तक सघन पूछताछ हुई। बेटे के पकड़े जाने की खबर जैसे ही रामगोपाल तक पहुंची, उनका सारा तिलिस्म और पुलिस को छकाने का आत्मविश्वास टूट गया। बुधवार की दोपहर, भगवान के भरोसे बचने की उम्मीद छोड़ चुके रामगोपाल खुद EOW मुख्यालय पहुंचे और सरेंडर कर दिया। उनकी गिरफ्तारी की कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रात करीब 8:30 बजे उनके बेटे वैभव को छोड़ दिया गया।

बोरियों और कार्टन में आता था 800 करोड़ का कैश

यह केवल एक फरारी का खेल नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच में यह बात सामने आई है कि पार्टी फंड के नाम पर रामगोपाल ने करीब 800 करोड़ रुपए की अवैध वसूली की। यह रकम इतनी बड़ी थी कि इसे ठिकाने लगाने के लिए बोरियों और कार्टन का इस्तेमाल किया जाता था। कांग्रेस के अकाउंटेंट और रामगोपाल के निज सहायक देवेंद्र डड़सेना ने भी अपने बयानों में स्पष्ट किया है कि कोल घोटाले का यह काला पैसा सीधे कांग्रेस भवन आता था। इसके बाद रामगोपाल के जरिए इस पूरी रकम को हवाला के नेटवर्क से 'दिल्ली' के आकाओं तक पहुंचाया जाता था।