
सीतापुर (सरगुजा)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली गंभीर वारदात सामने आई है। सीतापुर थाना क्षेत्र में शादी समारोह से लौट रही दो नाबालिग बच्चियों के साथ 12 शराब के नशे में धुत दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। यह घटना जितनी भयावह है, स्थानीय पुलिस का रवैया भी उतना ही निराशाजनक रहा। एक तरफ प्रदेश में 'सुशासन' (Good Governance) और मजबूत कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ इतनी गंभीर वारदात के बाद भी पीड़ितों को न्याय के लिए थाने के चक्कर काटने पड़े और एफआईआर दर्ज कराने के लिए भारी जनदबाव बनाना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक घटना 24 अप्रैल की रात की है। सीतापुर थाना इलाके के एक मोहल्ले में शादी समारोह चल रहा था। रात करीब 10 बजे चार नाबालिग सहेलियां शादी का कार्यक्रम देखकर अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान हाईस्कूल के पास 5-6 बाइकों पर सवार लगभग 12 मनचलों ने उनका रास्ता रोक लिया। सभी युवक शराब के नशे में बुरी तरह धुत थे। उन्होंने डरा-धमकाकर बच्चियों के साथ बदसलूकी शुरू कर दी और जबरन दो बच्चियों को अलग-अलग बाइक पर बैठा लिया।
एक मौके से भागी, दूसरी ने चलती बाइक से लगाई छलांग
इस खौफनाक मंजर के बीच एक नाबालिग बच्ची किसी तरह मौका पाकर वहां से भाग निकलने में कामयाब रही। वहीं, दरिंदे अन्य बच्चियों को लेकर सुनसान इलाके की तरफ बढ़े। अपहरण का शिकार हुई एक अन्य लड़की ने अपनी आबरू और जान बचाने के लिए अदम्य साहस का परिचय दिया। उसने चलती बाइक से छलांग लगा दी और अंधेरे का फायदा उठाकर खेतों के उबड़-खाबड़ रास्तों से भागकर अपनी जान बचाई।
खेत और मैदान में दरिंदगी
लेकिन दो अन्य 15 वर्षीय किशोरियां इन हैवानों के चंगुल से नहीं बच सकीं। दरिंदों ने दोनों को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर अपनी हवस का शिकार बनाया। एक किशोरी को खेत में ले जाकर चार युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया, जबकि दूसरी किशोरी के साथ हाईस्कूल मैदान के पास तीन अन्य युवकों ने मिलकर हैवानियत की हदें पार कर दीं।
सुशासन पर सवाल: पुलिस ने पीड़ितों को बैरंग लौटाया
इस काली रात के बाद, 25 अप्रैल की शाम को बदहवास पीड़िताओं ने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई। परिजन न्याय की आस में तुरंत सीतापुर थाने पहुंचे। यहीं से सुशासन के दावों की जमीनी हकीकत उजागर होती है। इतनी बड़ी और संवेदनशील घटना (पॉक्सो) होने के बावजूद, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें 'अगले दिन आने' की बात कहकर थाने से चलता कर दिया। यह पुलिसिया कार्यप्रणाली इस दावे पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है कि क्या 'सुशासन' वाले राज में भी आम आदमी और खासकर महिलाओं के लिए त्वरित न्याय सिर्फ एक कागजी नारा बनकर रह गया है?
जनप्रतिनिधियों के घेराव के बाद हुई FIR
जब पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया, तो अगले दिन 26 अप्रैल को जिला पंचायत सदस्य और भारी संख्या में आक्रोशित स्थानीय लोग थाने का घेराव करने पहुंच गए। हंगामे और भारी दबाव के बाद आखिरकार बैकफुट पर आई पुलिस की नींद टूटी। पुलिस ने आनन-फानन में प्रियांशु खलखो, आशीष, राहुल और एक अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 70(2) और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
8 फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश
मामले की गंभीरता पर सरगुजा के एएसपी अमोलक सिंह ने बयान जारी करते हुए बताया कि सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत पर चार नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित कर दी गई हैं, जो घटना में शामिल अन्य 8 संदिग्धों और फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। फिलहाल, इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश का माहौल है।