हल्का बुखार, सिरदर्द, सर्दी-जुकाम या बदन दर्द होने पर कई लोग बिना डॉक्टर से सलाह लिए मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं. कुछ लोग पुराने पर्चे की दवा दोबारा ले लेते हैं या किसी परिचित की सलाह पर इलाज शुरू कर देते हैं. हालांकि हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और बीमारी का कारण अलग होता है, इसलिए जो दवा एक व्यक्ति के लिए सुरक्षित है, जरूरी नहीं कि वही दूसरे के लिए भी सही हो. बिना जांच और विशेषज्ञ की सलाह के दवा लेने से बीमारी का सही कारण छिप सकता है और कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड, दर्द निवारक दवाएं, नींद की गोलियां, हार्मोनल दवाएं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दवाएं कभी भी डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं लेनी चाहिए. इन दवाओं की सही मात्रा और अवधि मरीज की उम्र, बीमारी और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर तय की जाती है. गलत तरीके से इनका इस्तेमाल करने पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, लिवर और किडनी को नुकसान, हार्मोनल असंतुलन या अन्य गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं. इसके अलावा कुछ दवाएं दूसरी दवाओं के साथ मिलकर खतरनाक रिएक्शन भी पैदा कर सकती हैं.

बिना सलाह दवा लेने से बीमारी लंबे समय तक छिपी रह सकती है, जिससे सही इलाज में देरी होती है. कई लोगों में एलर्जी, उल्टी, चक्कर आना, त्वचा पर चकत्ते, पेट से जुड़ी समस्याएं या अन्य गंभीर साइड इफेक्ट्स भी देखने को मिल सकते हैं. अगर कोई परेशानी बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है.

दवा लेते समय हमेशा डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें और निर्धारित मात्रा व समय पर ही दवा लें. किसी भी दवा का कोर्स बीच में अपनी मर्जी से बंद न करें और न ही किसी दूसरे व्यक्ति की दवा का इस्तेमाल करें. दवा लेने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट जरूर जांचें. यदि दवा लेने के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी दवा का सेवन करने से बचना चाहिए.