
रायपुर।छत्तीसगढ़ डाक परिमंडल के भीतर इन दिनों प्रशासनिक निर्णयों को लेकर विभागीय हलकों में खासी हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में मुख्य पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय की तरफ से एक नया आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के बाहर आते ही डाक विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दरअसल, विभाग के इस नए फैसले में एक तरफ जहां तत्काल प्रभाव से एक तबादला किया गया है, वहीं दूसरी तरफ एक अन्य अधिकारी को एक साल का सेवा विस्तार प्रदान किया गया है। यह प्रशासनिक बदलाव अब डाक महकमे की नियमित बातचीत का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा बात रेल डाक सेवा (RMS) रायपुर में कार्यरत अधीक्षक सरजीत सरकार के बारे में हो रही है। जानकारी के अनुसार, सरजीत सरकार पिछले चार वर्षों से रायपुर में इसी एक पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अगर केंद्रीय विभागों की सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों की बात करें, तो आमतौर पर किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद कर दिया जाता है। लेकिन यहां स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। तीन वर्ष के सामान्य नियम के बजाय चार वर्ष से एक ही पद पर काम कर रहे अधिकारी को अब एक वर्ष का अतिरिक्त सेवा विस्तार दे दिया गया है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों के बीच इस निर्णय को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
एक ओर जहां रायपुर में सेवा विस्तार चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर एक अन्य अधिकारी का तबादला आदेश भी जारी हुआ है। एच.आर. साहू, जो अब तक अंबिकापुर में सहायक डाक अधीक्षक (ASP) के पद पर कार्यरत थे, उनके लिए नई पदस्थापना तय की गई है। विभाग ने उन्हें अंबिकापुर से हटाकर कांकेर में डाक अधीक्षक (Superintendent of Post Offices) का प्रभार सौंप दिया है। यह तबादला आदेश जारी होने के साथ ही तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। एक तरफ जहां त्वरित रूप से अधिकारी को नई जगह भेजा गया है, वहीं दूसरी तरफ एक ही स्थान पर लंबे समय तक काम करने का मौका दिया गया है। इसी अंतर के कारण डाक परिमंडल में फैसले लेने के तरीके पर बात हो रही है।
सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ डाक सर्किल में हाल के कुछ वर्षों में प्रशासनिक कामकाज और तबादले-पोस्टिंग के फैसलों में काफी बदलाव देखने को मिला है। स्थानांतरण और सेवा विस्तार की इन ताजी प्रक्रियाओं के पीछे मुख्य कारण क्या हैं, इसका कोई भी जिक्र विभाग की ओर से जारी आदेश में नहीं किया गया है। आधिकारिक रूप से इसे केवल एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। फिर भी, पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय से निकले इस आदेश के बाद विभागीय लॉबी में लगातार बातें हो रही हैं।
अधिकारी इसी बात पर मंथन कर रहे हैं कि तीन साल के नियम के बावजूद चार साल के कार्यकाल और फिर एक साल के एक्सटेंशन के क्या मायने हो सकते हैं। डाक विभाग में ऐसे आदेश अक्सर अधिकारियों के बीच उत्सुकता जगाते हैं। वर्तमान में रायपुर और अंबिकापुर से लेकर कांकेर तक इस प्रशासनिक फेरबदल की गूंज सुनाई दे रही है। एच.आर. साहू अब कांकेर में डाक अधीक्षक के तौर पर अपना नया काम देखेंगे, जबकि सरजीत सरकार रायपुर रेल डाक सेवा में अधीक्षक के रूप में अगले एक साल तक काम करते रहेंगे। कुल मिलाकर विभाग में कामकाज जारी है, लेकिन अंदरूनी चर्चाओं में यह तबादला और सेवा विस्तार ही छाया हुआ है।